मंगलवार, 10 जुलाई 2018

पहाड

भारतीय अंग्रेजी कविता के प्रमुख नामों में शामिल निसीम एजेकिल की एक कविता 'दी हिल" एक फिलोसोफिकल कविता है। मेरे समझ के अनुसार जीवन पहाड़ सा है, जितना इसे हम जानते हैं, उतना नहीं भी, जितना है हमारे साथ है, उतना ही अकेला भी। इस अंग्रेज़ी कविता का अनुवाद करने की कोशिश की है। अनुवाद बहुत बढ़िया नहीं हो पाया है। फिर भी।
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पहाड
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दृढ़ता के साथ अकेला खड़ा
यह पहाड़
अन्य पहाड़ों की तरह
सबके लिए सुलभ है
अमिट छाप छोड़ता है यह मस्तिष्क में
अनदेखा नहीं कर सकते इसे
बशर्ते कि कोई भारी जोखिम में फंसा हो।
इसका आनंद दूर से न उठायें
यह इतना भी दूर नहीं कि
आप पहुँच न सकें
यह खेल है
आरोहण के लिए।
एक पहाड़ मांगता ही क्या है
ज़ज़्बे से भरा आदमी
जैसे पत्थरों को फाड़
निकलता है दूब , फूल
सामना करता है सूरज का
और झुलस जाता है।
मुझे स्वयं से कितनी बार
कहना चाहिए
औरों से क्या कहूँ कि
करो स्वयं के हौसले पर भरोसा ,
हर बात में, हर मौके पर
बार बार।
और जब एक बार आप
जीवन का आनंद लेना शुरू करते हैं तब
क्या अस्तित्व ?
क्या जीवन ?
कौन करता है इनकी फ़िक्र
हाँ ! मैं कविता की बात नहीं कर रहा
मैं बात कर रहा हूँ तिल तिल
होने वाले अपमानो की
जिसे नाम देते हैं जीवन का।
मैं कहता हूँ : इसे ख़त्म करो
मैं कहता हूँ : तुम्हे पहाड़ों से करना होगा प्रेम
तुम हो क्रोधित ,
तुम हो अधीर
कि तुम क्यों पहाड़ पर नहीं हो
हालाँकि दान-पुण्य का काम है
फिर भी स्वयं को माफ़ मत करो
विडंबना भरे जीवन
या स्वीकार्यता से संतुष्ट मत होना
किसी व्यक्ति को मरते हुए
हंसना नहीं चाहिए
आराम से मरते हुए आप
अलग समय काल में चले जाते हैं
जो स्वयं पहाड़ है
और आपको लगता रहा है कि
आप इससे परिचित हैं।
- अनुवाद : अरुण चन्द्र रॉय
मूल कविता


The Hill
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This normative hill
like all others
is transparently accessible,
out there
and in the mind,
not to be missed
except in peril of one's life.
Do not muse on it
from a distance:
it's not remote
for the view only,
it's for the sport
of climbing.
What the hill demands
is a man
with forces flowering
as from the crevices
of rocks and rough surfaces
wild flowers
force themselves towards the sun
and burn
for a moment.
How often must I
say to myself
what I say to others:
trust your nerves—
in conversation or in bed
the rhythm comes.
And once you begin
hang on for life.
What is survival?
What is existence?
I am not talking about
poetry. I am
talking about
perishing
outrageously
and calling it
activity.
I say: be done with it.
I say:
you've got to love that hill.
Be wrathful, be impatient
that you are not
on the hill. Do not forgive
yourself or other,
though charity
is all very well.
Do not rest
in irony or acceptance.
Man should not laugh
when he is dying.
In decent death
you flow into another kind of time
which is the hill
you always thought you knew.
- Nissim Ezekiel

4 टिप्‍पणियां:

  1. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, पॉवर पॉईंट प्रेजेंटेशन - ब्लॉग बुलेटिन “ , मे आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  2. सुन्दर अनुवाद अरुण जी बेहद खूबसूरती से प्रस्तुत किया है आपने ।

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