बुधवार, 6 नवंबर 2013

जब कोई मरता है



जब कोई मरता है 
मैं चाहता हूँ 
खा लूं भर पेट भात 
डरता हूँ मैं 
मरने से 

जब कोई मरता है 
मैं चाहता हूँ 
उतार कर फेंक दूं 
अपने सारे कपडे 
नंगा हो जाऊं 
डरता हूँ मैं 
भार से 


जब कोई मरता है 
मैं चाहता हूँ 
मुनादी करवा दूं 
गाँव गाँव 
शहर शहर 
डरता हूँ मैं 
कहीं लौट न आये वह 

किसी के मरने से 
बहुत खुश होता हूँ मैं 
क्यूँ कि 
मरने वाला नहीं लौटेगा 
वसूलने उधारी 
सलटाने बकाया हिसाब 




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ए. के. रामानुजम की कविता "दी स्ट्राईडर्स" का अनुवाद - जलीय कीट बाकी सब कुछ छोडिये  कुछ पतले पेट वाले  बुलबुले सी पारदर्शी आँख...