मंगलवार, 14 फ़रवरी 2017

प्रेम

पृथ्वी 
जैसे घूमती है 
धुरी पर अपने 
तुम घूम रही हो 
निरंतर 
चाँद जैसे 
निहारता है पृथ्वी को 
मैं, तुम्हे

मेरे लिए प्रेम
एक दिन का उत्सव नहीं !

रविवार, 12 फ़रवरी 2017

झारखण्ड एक्सप्रेस

धरती का अनाम टुकड़ा
अनाम लोगों की धरती
जंगल झाड़ और पहाड़ की धरती
यही तो है झारखण्ड
आदिम सभ्यता
विकास की अंधी दौड़ में
सबसे पीछे
सूरज पेड़ नदी की साथी भूमि
यही तो है झारखंड

गाँव अब भी गाँव
शहर अब भी उनींदे
बरसाती नदियां अब भी
पानी के इन्तजार में
दहकते पलाश
और गिरते महुए
यही तो है झारखंड

अधनंगे लोग
अधपेट बच्चे
पसली दिखाते शिशु
यही तो है झारखण्ड

इसी धरती को
देश की राजधानी से जोड़ने के लिए
चलती है एक ट्रेन
झारखण्ड एक्सप्रेस 

शुक्रवार, 3 फ़रवरी 2017

बाजार

मूर्तियां 
जो बिक गई 
ईश्वर हो गईं 
पूजी गईं 
जो बिक न सकी 
मिट्टी रह गईं 

मिट्टी में मिल गईं 


बुधवार, 25 जनवरी 2017

तिरंगे का रंग



मेरे गाँव के बच्चे
जो कभी कभी ही
जाते हैं स्कूल
आज
घूम रहे हैं लेकर तिरंगा
लगा रहे हैं नारे
भारत माता की जय

भारत माता
उनकी अपनी माता सी ही है
जो नहीं पिला पाती है
अपनी छाती का दूध
क्योंकि वह बनता ही नहीं
मुझे वे कोरबा के आदिवासियों से लगते हैं तब
जिनकी जमीन पर बनता है
विश्व का अत्याधुनिक विद्युत् उत्पादन संयत्र
करके उन्हें बेदखल
अपनी ही मिटटी से , माँ से

मेरे गाँव के बच्चे का तिरंगा
बना है रद्दी अखबार पर
जिसपर छपा है
देश के बड़े सुपरस्टार का विज्ञापन
जो अपील कर रहा है
कुपोषण को भागने के लिए
विटामिन, प्रोटीन युक्त खाना खिलाने के लिए
सोचता हूँ कई बार कि
क्या सुपरस्टार को मालूम है
कैसे पकाई जाती है खाली हांडी और भरा जाता है पेट
जीने के लिए, पोषण के लिए नहीं
और कुपोषितों तक नहीं है पहुच
अखबारों की

हाँ ! मेरे गाँव के बच्चों का तिरंगा
बना है रद्दी अखबार से
ऊपर केसरिया की जगह
लाल रंग है
जो उसने चुरा लिया है
माँ के आलता से
उसे मालूम नहीं कि
केसरिया और लाल रंग में
क्या है फर्क
फिर भी रंग दिया है
अखबार को आधे लाल रंग से
और स्याही से रंग दिया है
आधे अखबार को
हरियाली की जगह

मेरे गाँव के बच्चे को
नहीं मालूम कि
हरियाली कम हो रही है देश में , गाँव में
और कार्पोरेटों का सबसे प्रिय रंग है नीला
नीला क्योंकि आसमान है नीला
नीला क्योंकि समंदर है नीला
कार्पोरेट को चाहिए
आसमान और समंदर सा नीला विस्तार
किसी भी कीमत पर
ऐसा कहा जाता है
उनके कार्पोरेट आइडेनटिटी मैनुअल और विज़न स्टेटमेंट में

और हाँ
बीच में श्वेत रंग की जगह
अखबार के छोटे छोटे अक्षर झांक रहे हैं
अब बच्चे को क्या मालूम कि
अखबार के छपे के कई निहितार्थ होते हैं
और श्वेत शांति का नहीं रहा प्रतीक

मेरे गाँव के बच्चे
आज फहरा रहे हैं तिरंगा
जिसमे  नहीं है
केसरिया, हरियाली या सफेदी ही

सोमवार, 16 जनवरी 2017

विमुद्रीकरण



                         

रुपया 
जो कागज़ हो गया 
कागज़ हो गया 
जीवन 
गीला हो रहा है 
जो गीले हो रहे हैं 
नयन।  

सुना है 
रुपया होता है 
कुछ सफ़ेद 
और कुछ काला 
काला रुपया होता है 
गोरे चमचमाते लोगों के पास 
फैक्ट्री की चिमनियों 
बड़ी बड़ी गाड़ियों में 
और सफ़ेद रुपया 
बंधा होता है 
मैली पसीने से गंधाती 
धोती, साडी की अँटियों में।  

उम्मीद और जोश 
भरा है आँखों में 
जब सारा काला रुपया 
सफ़ेद होकर रहेगा 
मैली पसीने से गंधाती 
धोती और साड़ियों की अँटियों में 
अन्यथा विमुद्रीकरण भी 
सरकार की तमाम अन्य नीतियों की भांति 
बनकर रह जायेगा 
एक छद्म।  

शनिवार, 3 दिसंबर 2016

भोपाल


भोपाल

शहर के बनने और बसने के बीच
उजड़ता है बहुत कुछ
कुछ मंदिर
कुछ मस्जिद
कुछ महल और
कुछ मजारे
बची रहती हैं
है बार उजड़ने से पहले

न मालूम सदियों पहले
जिसे राजा भोज ने
बसाया था
कौन रहा होगा
इस नगर भोपाल की
भीमवेटिका की गुफाओं में

और जब नवावो ने
बनाये होंगे हवेलियाँ
कितने ही हाथों के ज़ख्म
दफन होंगी इनमे

शहर तमाम दुखों के बाद भी
रहता है ज़िंडा
जैसे ज़िंदा है आज भोपाल
उस गैस रिसाव हादसे के बाद

कौन देख रहा है आज
रिसते हुए औरतों को
खांसते हुए आदमियों को
जली हुई चमड़ी लेकर पैदा हुए बच्चों को
कौन पढ़ रहा है
न्यायालयों की याचिकाओं में दर्ज़
मुर्दा नामों को

खड़े हैं फन उठाये
आज भी अवशेष
रिस रिस धरती की कोख में
भर रहे हैं विष
तिल तिल रोज़
न्यायलय की बंद मिसाइलों के खुलने की
प्रतीक्षा में
और मर रहे हैं मरे हुए लोग
हादसे की टीस को कम नहीं
नहीं होने देते वर्षी पर छपने वाली रिपोर्टें

भोपाल आज भी ज़िंदा है
ज़िंदा हैं वे हज़ारों शव
रिसते हुए  ।

( आज भोपाल गैस हादसे को 27 साल हो गए हैं। बीस हजार से अधिक मौतें हुई थी। आज भी हज़ारों टन दूषित मालवा पड़ा है हादसे स्थल पर और लोगों को बीमार कर रहा है।  इसको हटाने का मामला भी कोर्ट में धक्के खा रहा है। शहर फिर भी ज़िंदा है।  श्रद्धांजलि स्वरुप मेरी एक कविता। )

बुधवार, 2 नवंबर 2016

कौशल विकास योजना : रोज़गार के लिए तैयार होते युवा


कौशल विकास योजना : रोज़गार के लिए तैयार होते युवा 

अरुण चंद्र रॉय 


प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) को लागू किये 31 मार्च 2016 को दो वर्ष पूरा हो गया। एनडीए सरकार के सत्ता में आने के बाद शुरू की गई नयी नीतियों में यह एक महत्वपूर्ण नीति है।  देश में युवाओं के कौशल विकास के लिए यह नीति तैयार की गई है ताकि पूरे देश में सभी तरह के कौशल प्रशिक्षण के प्रयासों में निरंतरता, सामंजस्य और समन्वय स्थापित किया जा सके। इस नीति के लागू करने का उद्देश्य कौशल विकास में मुख्य बाधाओं को दूर करना, कुशल कार्मिको की आपूर्ति एवं अंतर को पाटने के लिए कुशलता की मांग को पूरा करना, सामाजिक/भौगोलिक रूप से वंचित एवं कमजोर समुदाय के लोगों को न्यायसंगत तरीके से अवसर मुहैया कराना और महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए महिलाओं के लिए कौशल विकास एवं उद्यमिता के कार्यक्रम को रेखांकित करना।  
 
कौशल के पारिस्थितिकी तंत्र को फिर से जीवंत करने  और दुनियाभर में स्किल्ड वर्क फ़ोर्स का रिसोर्स सेंटर बनाने की दिशा में सरकार कौशल विकास और उद्यमिता 2015 नाम से यह स्कीम लेकर आई है।  गत दो वर्षों में इस स्कीम का प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा है।  राष्ट्रीय कौशल विकास निगम द्वारा निजी तौर पर कौशल प्रशिक्षण वातावरण तैयार किया गया और  साझेदारों ने पिछले दो वर्षों में 60,78,999 को प्रशिक्षित किया और तकरीबन 19,273,48 लोगों को रोजगार दिलाया। राष्ट्रीय कौशल विकास निगम ने अब तक 80.33 लाख छात्रों को प्रशिक्षित किया। राष्ट्रीय कौशल विकास निगम ने अपनी मुहिम में 138 ट्रेनिंग साझेदारों को जोड़ा है।  देशभर में 267 प्रशिक्षण साझेदारों को जोड़ा गया। इस दो वर्षों के दौरान सरकार के विभिन्न मंत्रालयों को समन्वित करके पचास से अधिक कार्यक्रम संचालित किये गए साथ ही सभी मंत्रालयों में एक किस्म की सक्रियता देखी जा रही है।
इसी योजना का असर है कि देश में पहली बार राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क का संचालन (एनएसक्यूएफ)-कौशल प्रशिक्षण के परिणामों में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क को तैयार किया गया।  दिसंबर 2016 तक सभी सरकारी कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों को राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क  से जोड़ दिया जाएगा।
इस योजना के अन्तर्गत आईटीआई को पुनर्जीवित किया, 1,141 नए आटीआई बनाए गए जिनमें 1.73 लाख सीटें हैं और केंद्रीय प्रशिक्षण संस्थानों के महानिदेशालय ने 15,000 अनुदेशकों को प्रशिक्षित किया है। सभी राज्यों में स्थित सभी आईटीआई संस्थानों में आईएसओ 29990:2010 प्रमाणन की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है। 
पहले आईटीआई प्रशिक्षित छात्रों को बारहवी उत्तीर्ण नहीं माना जाता था।  किन्तु अब औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में दो वर्षीय डिप्लोमा कोर्स शुरू किया गया है जिसे 12वीं कक्षा के बराबर माना जाएगा। इसके फलस्वरूप इन कार्यक्रमों की ओर युवा छात्रों का रुझान बढा है।  
इस कार्यक्रम के अधीन दूरस्थ शिक्षा का ढांचा तैयार किया गया और 18000 से अधिक प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षित किया गया । सरकारी आईटीआई संस्थानों के प्रधानाचार्यों में क्षमता निर्माण को लेकर विभिन्न प्रकार प्रशिक्षण दिए गए इंजीनियरिंग कॉलेजों और पॉलिटेक्निक संस्थानों की शत-प्रतिशत उपयोगिता के लिए उनके साथ साझेदारी की गई है।
उद्यमिता- उद्यमिता के तहत शिक्षकों द्वारा बड़े पैमाने पर ओपेन ऑनलाइन कोर्स (एमओओसी) के जरिये 2200 कॉलेजों, 300 स्कूलों, 500 सरकारी आईटीआई संस्थानों, 50 व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्रों को उद्यमिता, शिक्षा एवं प्रशिक्षण मुहैया कराया गया।
नवंबर 2014 में नए मंत्रालय के गठन के साथ ही इसने अपने पहले साल में स्वतः ही एमएसडीई ने गतिशील कौशल पारिस्थितिकी तंत्र मजबूत कर ली और भारत के कौशल प्रशिक्षण पारिस्थितिकी तंत्र को पुन: जीवित करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है। आम आदमी को इन योजनाओं को लाभ मिले इसके लिए एमएसडीई ने अपनी निगरानी तंत्र को मजबूत किया है और लगातार इनकी निगरानी कर रहा है ताकि योजनाएं कागज़ी न रहकर जमीनी स्तर तक पहुचे और जनता को लाभन्वित करें।  


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