मंगलवार, 10 अक्तूबर 2017

हौसला

उड़ने के लिए
आसमान की कमी नहीं है
कमी है तो हौसले की

देखना तुम्हारे पैरों के नीचे ही
पडा हुआ है वह पत्थर
जिसे उछाल कर शुरू की जा सकती है
एक मुकम्मल क्रांति

निकलने के लिए पैर में चुभा काँटा
मत देखो आगे पीछे ऊपर नीचे
या दायें बाएं
इस्तेमाल करो एक और काँटा

रौशनी का महत्व
उन्हें कहाँ मालूम
जिन्होंने नहीं देखा अँधेरा
और रौशनी की ओर जाने वाला रास्ता
अक्सर अँधेरे से होकर जाता है

मंगलवार, 3 अक्तूबर 2017

छुट्टियों के दिन

छुट्टियों के दिन
जब बच्चे खेल रहे होते हैं
पार्कों में
घूम रहे होते हैं माल
एम्युजमेंट पार्क में कर रहे होते हैं
झूले में सैर
पानी के फव्वारे में
कर रहे होते हैं नृत्य
उसी दिन उत्साह में होते हैं
रेडलाईट पर खिलौने बेचते बच्चे
माल की पार्किंग में बलून बेचते बच्चे
मिठाई की दूकान पर पैकिंग करते बच्चे

कितनी  भिन्न होती हैं छुट्टियाँ
क्या राष्ट्रपति और प्रधानमन्त्री की शुभकामनाओं का रास्ता
पहुचता है इन तक.

रविवार, 24 सितंबर 2017

संघर्ष विराम

चलो डाल देते हैं
हथियार
स्वीकार कर लेते हैं
हार
बच जायेंगे कुछ बच्चे
असमय मृत्यु से
कुछ स्त्रियां बच जाएँगी
बलत्कृत होने से
कुछ किले मंदिर बच जायेंगे
ध्वस्त होने से

संघर्ष विराम की घोषणा से
कितने खुश होते हैं वृक्ष
नदी और चिड़िया। 

मंगलवार, 19 सितंबर 2017

अचानक



कल तक जो पेड़
हरे थे पत्तियों की वजह से
अचानक वे हरी पत्तियां
हो जाएँ लाल
रिसे उनसे टिप टिप लहू
क्या बैठ सकती हैं
उन शाखों पर
नन्ही चिड़िया
गा सकती हैं
क्या फुदक फुदक कर
चीं चीं . 

गुरुवार, 14 सितंबर 2017

हिंदी : कुछ क्षणिकाएं



रौशनी जहाँ
पहुंची नहीं
वहां की आवाज़ हो
भाषा से
कुछ अधिक हो
तुम हिंदी


खेत खलिहान में
जो गुनगुनाती हैं फसलें
पोखरों में जो नहाती हैं भैसें
ऐसे जीवन का तुम संगीत हो
भाषा से
कुछ अधिक हो
तुम हिंदी

बहरी जब
हो जाती है सत्ता
उसे जगाने का तुम
मूल मंत्र हो
भाषा से
कुछ अधिक हो
तुम हिंदी.

४ 
तुम मेरे लिए
मैथिली, अंगिका, बज्जिका
मगही, भोजपुरी
सब हो 

मंगलवार, 12 सितंबर 2017

मद्धम आंच

मद्धम आंच पर
पकती हैं
नरम रोटियां

मद्धम आंच पर ही
पकता है
कुम्हार का दिया और घड़ा
दिया जो आग से जलकर
रौशनी देता है
घड़ा जो पानी को सहेजता है
अपने भीतर

मद्धम आंच में
नहीं होता है
अहंकार
अट्टहास

मद्धम आंच पर
सिझता है प्रेम
धीरे धीरे सहजता से . 

गुरुवार, 7 सितंबर 2017

हत्यारा

यह समय
अनुकूल है
हत्या के लिए
अनुकूल है
हत्यारों के लिए भी .

हटा दो
जन्मजात बच्चो की नाक से लगी
आक्सीज़न की नली
यही नली लगा दो
किसानो के गले में
और उन्हें लटका दो
किसी पेड़ से या फिर छत से
या फिर किसी बिजली के खम्भे से

छेद दो गोलियों से
विरोधियों की कनपट्टी
ताकि उनकी आवाज़
न पहुचे सत्ताधीशों तक
न पहुचे आमजनों तक

किसी युवा को
थमा दो हथियार
दे दो निर्देश
किसी के भी धड से
अलग कर देने को गर्दन
जिनके विचार तुम्हारे विचार से
मेल नहीं खाते

यह समय
अनुकूल है
हत्या के लिए
अपने अपने तर्क
छुपा दो तकिये के नीचे .