बुधवार, 3 अक्तूबर 2018

गोल

ईश्वर ने
दुनिया गोल बनाई
उन्होंने सूरज को भी
गोल बनाया
चाँद भी गोल है
और जिसदिन दिखता  है पूरा गोल
लगता है वह सबसे सुन्दर

गोल चेहरा बच्चो का होता है
जब उनमे नहीं भरा होता है
दुनियावी बाते, झूठ और मक्कारी
घृणा और द्वेष
हिंसा, प्रतिहिंसा और क्रोध

जलते हुए दीप  की आभा भी
फैलती है गोलाकार में
सपनों का यदि कोई आकार होता तो
होता वह  वृताकार ही

रास्ते जो गोल चलते हैं
मंजिल की आपाधापी में नहीं रहते
ईश्वर की बनाई इस गोल दुनिया में
कहाँ रह गया है कुछ भी गोल ! 



जलीय कीट

ए. के. रामानुजम की कविता "दी स्ट्राईडर्स" का अनुवाद - जलीय कीट बाकी सब कुछ छोडिये  कुछ पतले पेट वाले  बुलबुले सी पारदर्शी आँख...