शुक्रवार, 21 अप्रैल 2017

मृत्यु


जीवन का 
अंतिम उत्सव है 
मृत्यु 

पत्तियां 
पीली पड़ जाती हैं 
मरने से पहले 
और छोड़ देती हैं 
शाखें 
पत्तियों का मरना 
वृक्ष के लिए नए कोपलों का 
फूटना भी है।  


इस ब्रह्माण्ड में 
कितनी ही सृष्टियाँ 
हर पल मरती हैं 
कहाँ रुकती है 
पृथ्वी 

मृत्यु का अर्थ 
रुकना नहीं है 
उत्सव है 

मैं चुनता हूँ मृत्यु 
तुम चुनो जीवन 
सही कहा न मैंने 
जीवन का अंतिम उत्सव है 
मृत्यु 


शनिवार, 15 अप्रैल 2017

झारखण्ड एक्सप्रेस -2



आशाएं लेकर चलती है 
झारखण्ड एक्सप्रेस 
हटिया में लद लद कर 
बैठते हैं सपने 
कुछ शिक्षा के 
कुछ रोज़गार के 
कुछ सेहत के 
लौट आती हैं 
कुछ खाली हाथ 
कुछ लहूलुहान 
कुछ अभिशप्त 
जो नहीं लौटती हैं 
वे खो देती हैं 
अपनी पहचान 

झारखण्ड एक्सप्रेस 
लौटती है लेकर बोरी भर कर 
हताशा ! 

गुरुवार, 6 अप्रैल 2017

प्रार्थना का धर्म


धान के बीज
बो दिए हैं तालाब के किनारे किनारे
उम्मीद में कि बादल बरसेंगे
और पौध बन उगेंगे
फिर से खेतो में रोपे जाने के लिए


सुबह दोपहर शाम
दो दो घड़े की बहंगी बना
सींच रहे हैं
धान के बीज वाली क्यारियां
पुरुष, स्त्री,
जवान होते बच्चे और बच्चियां
गाते हुए गीत
उमस और पसीने के बीच
जेठ की दुपहरी में 


साथ में कर रहे हैं प्रार्थना
बादलों से/इन्द्र से /मेढ़को से
/मंदिरों में /मस्जिदों में
ग्राम देवता से/स्थान देवता से
अपनी अपनी कुल देवियों से

उनकी  प्रार्थनाओं और गीतों में 
नहीं होता है कोई धर्म/जाति
होता है केवल
जल और जल