मंगलवार, 21 दिसंबर 2021

मन के भाव

 उदसियां बताती हैं 

कितना है प्रेम 

क्रोध बताता है 

कितनी है आसक्ति 

पीड़ा बताती है 

कितना है मोह।


प्रेम, मोह और आसक्ति 

सब मन के भाव के पर्याय हैं 

और कुछ नहीं। 









6 टिप्‍पणियां:

  1. नमस्ते,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा गुरुवार (23-12-2021 ) को 'नहीं रहा अब समय सलोना' (चर्चा अंक 4287) पर भी होगी। आप भी सादर आमंत्रित है। रात्रि 12:30 AM के बाद प्रस्तुति ब्लॉग 'चर्चामंच' पर उपलब्ध होगी।

    चर्चामंच पर आपकी रचना का लिंक विस्तारिक पाठक वर्ग तक पहुँचाने के उद्देश्य से सम्मिलित किया गया है ताकि साहित्य रसिक पाठकों को अनेक विकल्प मिल सकें तथा साहित्य-सृजन के विभिन्न आयामों से वे सूचित हो सकें।

    यदि हमारे द्वारा किए गए इस प्रयास से आपको कोई आपत्ति है तो कृपया संबंधित प्रस्तुति के अंक में अपनी टिप्पणी के ज़रिये या हमारे ब्लॉग पर प्रदर्शित संपर्क फ़ॉर्म के माध्यम से हमें सूचित कीजिएगा ताकि आपकी रचना का लिंक प्रस्तुति से विलोपित किया जा सके।

    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।

    #रवीन्द्र_सिंह_यादव

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  2. सही कहा आपने....सुंदर सारगर्भित कथन ।

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  3. गहरे भावों को व्यक्त करती बहुत ही खूबसूरत रचना..

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  4. किसी न किसी तरह तीनों प्रेम की ही अभिव्यक्तिय्याँ हैं ...
    लाजवाब ...

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