रविवार, 5 अप्रैल 2026

युद्ध में भूख

 जब दुनिया में चल रहा हो

युद्ध

भूख और प्यार का जिक्र करना है

देश को कमजोर करना ! 


जब आसमान में विचर रहे हों

बंबवर्षक विमान

खेतों में खड़ी फसल को बचाने की प्रार्थना करना है

देशद्रोह, जिसके लिए हो सकती है सजा भी !


सेना की भर्ती खुली है

बीच युद्ध के दौरान

और इसमें भर्ती होने से मना करना 

राष्ट्र के लिए कर्तव्य की अवहेलना है

जबकि रोजगार के अवसर भेंट चढ़ गए हैं

युद्ध के उन्माद के ! 


युद्ध लड़ती तो सेना है 

फिर भी इसके प्रभाव से कहां बचा रह सकता है

किसान, मजदूर, स्त्री और बच्चे ! 

शुक्रवार, 6 फ़रवरी 2026

बसंत

1. 

जंगल काटकर  

बनाये जा रहे हैं राजमार्ग 

और भेजकर रंगबिरंगे सन्देश 

हम मना रहे हैं 

बसंत का उत्सव ! 


2


हमारी बालकनी में 

बसंत टंगा है 

और खेतों में पीली सरसों 

पड रही है पीली 

परदेशी पिया की प्रतीक्षा में ! 


3

झड़ने शुरू हो जायेंगे 

पत्ते 

फेंक दिए जायेंगे 

बुहार कर शहर के बाहर 

कूड़े के ढेर में 

मिटटी से मिलने की उनकी चाहत 

अधूरी रह जायेगी 

इस बार भी . 

गुरुवार, 1 जनवरी 2026

गज़ल : छुपी है धूप

छुपी है धूप है भर गया कोहरा

बिना ज़ुर्म के मैं बन गया मोहरा 


जिम्मेदरियों ने मुझे झुकाया इतना 

पीठ मेरा देखो, ऐसे हो गया दोहरा 


नाराज हो जब, नदी बहाती भी है 

जब भी धार पर लगाया गया पहरा 


पहचानना कठिन है इन दिनों 

किसने चेहरे पे है लगाया चेहरा 


धर्म जाति का शोर हुआ इतना 

न्याय औ' संविधान बन गया बहरा