मंगलवार, 9 फ़रवरी 2016

इस तरह विकास

माटी काट कर 
तालाब बनाते हैं 
माटी काट कर 
तालाब भरते हैं 
इस तरह हम विकास करते हैं 


पेड काट कर
जंगल के लिए जगह तैयार करते हैं 
पेड़ लगा कर 
जंगल बढ़ाते हैं 
इस तरह हम विकास करते हैं 

फसल जला कर 
मुआवज़ा पाते हैं 
जो फसल उगा कर 
नहीं भर पाते पेट 
इस तरह हम विकास करते हैं 

14 टिप्‍पणियां:

  1. शायद यही विकास का तरीका है वर्त्तमान में...बहुत सटीक प्रस्तुति...

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  2. कैसा विरोधाभास .... हम कैसा विकास करते हैं ?
    सटीक पंक्तियाँ

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  3. इस तरह के विकास से विनाश नजदीक आता है ..
    सार्थक चिंतन ..

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  4. विकाश की यह प्रक्रिया ही जीवन और प्रकृति को चौपट कर रही है
    उत्कृष्ट और सार्थक
    सादर

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  5. सटीक व्यंग है अरुण जी ... हकीकत से रूबरू करा जाता है ...

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  6. अब RS 50,000/महीना कमायें
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  8. अरुण जी बहुत ही सुंदर रचना है। बहुत ही अच्छे रूप से आपने सामज को विकाश का आईना दिखाया है किस प्रकार से इंसान अपनी खुशियों के लिए पर्यावरण के साथ मज़ाक कर रहा है।आप ऐसी ही पर्यावरण से संबन्धित
    तेल ने किया पर्यावरण का तेल रचना भी पढ़ सकते हैं।

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