शनिवार, 12 जून 2021

वृक्ष

हर दिन पर्यावरण दिवस है . सम्पूर्ण प्रकृति से प्रेम करने का दिवस . पढ़िए अरुण चन्द्र रॉय की कविता वृक्ष 
-------------------------------

जिन्होंने पिता को नहीं देखा 
वे किसी वृक्ष के तने से लगकर गले 
महसूस कर सकते हैं 
पिता को . 

जिन्होंने मां के आँचल का सुकून 
नहीं किया महसूस कभी 
वे किसी वृक्ष के घने छाये से लिपट कर 
समझ सकते हैं मां को . 

फल फूलों से लकदक वृक्ष की शाखाओं से 
जाना जा सकता है किसी सच्चे दोस्त का 
निःस्वार्थ प्रेम . 

कटकर किसी चूल्हे का इंधन हो जाना 
वृक्ष का दधीचि हो जाना होता है 
कहाँ कोई है वृक्ष सा कोई संत ! 

5 टिप्‍पणियां:

  1. और अंत में साथ में जलकर शरीर को आत्मसात कर लेने वाला भी वृक्ष।

    जवाब देंहटाएं
  2. नमस्ते,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा सोमवार (14-06-2021 ) को 'ये कभी सत्य कहने से डरते नहीं' (चर्चा अंक 4095) पर भी होगी। आप भी सादर आमंत्रित है।

    चर्चामंच पर आपकी रचना का लिंक विस्तारिक पाठक वर्ग तक पहुँचाने के उद्देश्य से सम्मिलित किया गया है ताकि साहित्य रसिक पाठकों को अनेक विकल्प मिल सकें तथा साहित्य-सृजन के विभिन्न आयामों से वे सूचित हो सकें।

    यदि हमारे द्वारा किए गए इस प्रयास से आपको कोई आपत्ति है तो कृपया संबंधित प्रस्तुति के अंक में अपनी टिप्पणी के ज़रिये या हमारे ब्लॉग पर प्रदर्शित संपर्क फ़ॉर्म के माध्यम से हमें सूचित कीजिएगा ताकि आपकी रचना का लिंक प्रस्तुति से विलोपित किया जा सके।

    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।

    #रवीन्द्र_सिंह_यादव

    जवाब देंहटाएं
  3. कितनी गहराई इस रचना में .... बहुत भावप्रवण .

    जवाब देंहटाएं
  4. बहुत ही सुंदर सराहनीय सृजन।
    सादर

    जवाब देंहटाएं