मंगलवार, 14 सितंबर 2021

सैन्य छावनी से

 हम आधुनिक लोग हैं 

हमारे पास है दुनियां भर का ज्ञान

विज्ञान और तकनीक 

बन चुकी हैं हमारी दासियां 

हमारे पास सब जानकारियां मौजूद हैं 

राजा से प्रजा तक की, कि

कौन कब उठता है, नहाता है, 

कब खाता पीता है, क्या खाता पीता है 

कैसे कपड़े पहनता है 

जाति मूल धर्म और आस्था तक की गणना 

कर ली हमने ।


हम क्षमता रखते हैं

 एक दूसरे के व्यवहार और निर्णयों को प्रभावित करने  की

 उन्हें अपने हितों के अनुसार उपयोग और उपभोग करने की 

हम हिंसा में विश्वास नहीं करते -- ऐसा कहते कहते 

हमने हथिया लिए सब पहाड़, नदी, जंगल 

और प्रयोग कर लिए इतिहास से सबसे खतरनाक हथियार 

जिसके हथियार जितने खतरनाक हैं 

वह उतना ही बौद्धिक और शक्तिशाली माना जायेगा 

हमने निर्धारित कर दिए ऐसे नियम। 

कहने को तो और भी बातें हैं किंतु 

संक्षेप में समझें इसे, अंत में 

हम बेचते हैं युद्ध और 

खरीदते हैं शांति,

इसे आप तब तक नहीं समझेंगे जब तक आप 

दो दिन गुजार न लें किसी सैन्य छावनी में। 











9 टिप्‍पणियां:

  1. जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना शुक्रवार १७ सितंबर २०२१ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    सादर
    धन्यवाद।

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  2. हम बेचते हैं युद्ध और

    खरीदते हैं शांति,

    इसे आप तब तक नहीं समझेंगे जब तक आप

    दो दिन गुजार न लें किसी सैन्य छावनी में।

    –सत्य कथन
    –साधुवाद

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  3. वाह..। कटू सत्य... और गहरा लेखन..।

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  4. हम हिंसा में विश्वास नहीं करते -- ऐसा कहते कहते

    हमने हथिया लिए सब पहाड़, नदी, जंगल

    और प्रयोग कर लिए इतिहास से सबसे खतरनाक हथियार

    सार्थक लेखन ।

    जवाब देंहटाएं
  5. सराहना से परे...बेहतरीन सृजन।

    संक्षेप में समझें इसे, अंत में
    हम बेचते हैं युद्ध और
    खरीदते हैं शांति,
    इसे आप तब तक नहीं समझेंगे जब तक आप
    दो दिन गुजार न लें किसी सैन्य छावनी में... कटु सत्य।
    गहरे में उतरता सृजन।
    सादर नमस्कार

    जवाब देंहटाएं
  6. चिंतनीय एवं प्रभावी सृजन ।

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  7. हम बेचते हैं युद्ध और

    खरीदते हैं शांति,

    इसे आप तब तक नहीं समझेंगे जब तक आप

    दो दिन गुजार न लें किसी सैन्य छावनी में।
    सही कहा सैन्य छावनी में जाकर ही पता चलती है आजादी एवं शान्ति की कीमत...
    लाजवाब सृजन।

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