मंगलवार, 16 दिसंबर 2025

साल की आखिरी कविता

साल की आखिरी कविता में 

 होना चाहिए इस बात का जिक्र कि 
साल के बदल जाने के बाद 
क्या क्या बदलेगा 
और क्या क्या रह जायेगा 
पहले जैसा?  

रोटी की गोलाई
बढ़ेगी या वह छोटी हो जाएगी 
पिछले साल की तुलना में 
इस बात का जिक्र जरूर होना चाहिए 
साल की आखिरी कविता में ! 

अँधेरा कितना कम  हुआ 
या कितना बढ़ा 
किसके हिस्से आये 
रोशनी के टुकड़े 
किसके कोने रह गए अँधेरे 
कितने हाथों को मिला काम 
कितने हाथ करते रहे इन्तजार  
शहर के लेबर चौक पर, 
इस बात का हिसाब किताब 
लगाता कोई अपनी कविता में 
तो कितना अच्छा होता ! 

कितने पेड़ कटे 
नदियों का जल कितना हुआ कम 
मछलियां कितनी घटी 
और कितना बढ़ा हवा में जहर 
नहीं मालूम कि  
ये सब बातें कविता के विषय हैं या नहीं 
नहीं भी हों तब भी क्या गलत है 
इन बातों का जिक्र 
साल की आखिरी कविता में ! 

12 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर रचना, कैलेंडर बदलने से कुछ नहीं बदलता है, रोज वही खिट खिट

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  2. मोदी के होते हुए इतनी निराशा अच्छी नहीं :) कविता बहुत अच्छी है :)

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    1. मोदी जी से पहले और उनके बाद भी समस्याएं रहेंगी और जहां मोदी जी नहीं हैं वहां भी दिक्कतें हैं

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  3. वाक़ई साल की आख़िरी कविता में वह सब कुछ होना चाहिए, जो पाया हमने पिछले साल में और वह भी जो खोया हमने

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