साल की आखिरी कविता में
होना चाहिए इस बात का जिक्र कि
साल के बदल जाने के बाद
क्या क्या बदलेगा
और क्या क्या रह जायेगा
पहले जैसा?
रोटी की गोलाई
बढ़ेगी या वह छोटी हो जाएगी
पिछले साल की तुलना में
इस बात का जिक्र जरूर होना चाहिए
साल की आखिरी कविता में !
अँधेरा कितना कम हुआ
या कितना बढ़ा
किसके हिस्से आये
रोशनी के टुकड़े
किसके कोने रह गए अँधेरे
कितने हाथों को मिला काम
कितने हाथ करते रहे इन्तजार
शहर के लेबर चौक पर,
इस बात का हिसाब किताब
लगाता कोई अपनी कविता में
तो कितना अच्छा होता !
कितने पेड़ कटे
नदियों का जल कितना हुआ कम
मछलियां कितनी घटी
और कितना बढ़ा हवा में जहर
नहीं मालूम कि
ये सब बातें कविता के विषय हैं या नहीं
नहीं भी हों तब भी क्या गलत है
इन बातों का जिक्र
साल की आखिरी कविता में !
Wahh- बहुत अच्छा
जवाब देंहटाएंआभार वर्मा जी
हटाएंसटीक
जवाब देंहटाएंधन्यवाद
हटाएंबहुत सुंदर
जवाब देंहटाएंशुक्रिया हरीश जी
हटाएंबहुत सुन्दर रचना, कैलेंडर बदलने से कुछ नहीं बदलता है, रोज वही खिट खिट
जवाब देंहटाएंधन्यवाद विमल जी
हटाएंमोदी के होते हुए इतनी निराशा अच्छी नहीं :) कविता बहुत अच्छी है :)
जवाब देंहटाएंमोदी जी से पहले और उनके बाद भी समस्याएं रहेंगी और जहां मोदी जी नहीं हैं वहां भी दिक्कतें हैं
हटाएंवाक़ई साल की आख़िरी कविता में वह सब कुछ होना चाहिए, जो पाया हमने पिछले साल में और वह भी जो खोया हमने
जवाब देंहटाएंधन्यवाद
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