सोमवार, 5 सितंबर 2011

शिक्षक : कुछ क्षणिकाएं

१.
आपने
पढाया तो था
'प' से प्यार
न जाने
कब कैसे
बन गया
'प' से पैसा


मोटे चश्मे में
आपकी छवि
आदर्श बन न सकी
बदल लीजिये 
अब तो इसे


हे मेरे प्रथम शिक्षक !
आपका योगदान
वैसे ही अप्रत्यक्ष रहेगा
जैसे गगनचुम्बी ईमारत के नीचे दबी
नींव की ईंट

४.
एक दिन
याद करने की
परंपरा चल पडी है
आपको ही  नहीं
माता पिता
भाई बहन
मित्र सबको,
धन्यवाद कीजिये कि
भुलाये नहीं गए हैं आप

45 टिप्‍पणियां:

  1. हे मेरे प्रथम शिक्षक !
    आपका योगदान
    वैसे ही अप्रत्यक्ष रहेगा
    जैसे गगनचुम्बी ईमारत के नीचे दबी
    नींव की ईंट
    Bilkul sahee kaha!

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  2. शिक्षक दिवस की बहुत बहुत बधाई सर।

    कविता अच्छी लगी।

    सादर

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  3. सुन्दर क्षणिकाएं.पहली वाली खास पसंद आई.

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  4. सटीक और शानदार प्रस्तुति , आभार

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  5. अध्यापकदिन पर सभी, गुरुवर करें विचार।
    बन्द करें अपने यहाँ, ट्यूशन का व्यापार।।

    छात्र और शिक्षक अगर, सुधर जाएँगे आज।
    तो फिर से हो जाएगा, उन्नत देश-समाज।।
    --
    शिक्षक दिवस पर डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी को नमन करते हुए आपको शुभकामनाएँ प्रेषित करता हूँ!

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  6. माँ के श्रम सा श्रम वो करती |
    अवगुण मेट गुणों को भरती ||

    टीचर का एहसान बहुत है --
    उनसे यह जिंदगी संवरती ||

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  7. सामयिक एवं मारक अख्यांश सफल हैं अपने लक्ष्य में ...
    शुभकामनायें शिक्षक दिवस की ........./

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  8. गहरा असर छोड़तीं क्षणिकाएं ! ..शुभकामनायें आपको !

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  9. सुन्दर क्षणिकायें।
    शिक्षक दिवस पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनायें

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  10. sach kahaa , shikshak neenv ki eent ....shukr hai bhulaya nahi hai ...uska yogdaan to sarahneey hota hai ...

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  11. हरेक क्षणिका सटीक और लाजवाब। बधाई

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  12. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल मंगलवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!
    यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

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  13. आपने
    पढाया तो था
    'प' से प्यार
    न जाने
    कब कैसे
    बन गया
    'प' से पैसा
    waah....

    उत्तर देंहटाएं
  14. आपने
    पढाया तो था
    'प' से प्यार
    न जाने
    कब कैसे
    बन गया
    'प' से पैसा
    सच उकेरती सटीक क्षणिकाएं

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  15. बहुत ही सुंदर क्षणिकाएं ...शुभकामनायें

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  16. ना तो अच्छे गुरु रहे,ना ही अच्छे शिष्य.
    कौन सँवारे किस तरह,बच्चे तेरा भविष्य.

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  17. ४.
    एक दिन
    याद करने की
    परंपरा चल पडी है
    आपको ही नहीं
    माता पिता
    भाई बहन
    मित्र सबको,
    धन्यवाद कीजिये कि
    भुलाये नहीं गए हैं आप!
    बेहद सटीक व्यंग्य ! अपने समय से संवाद करता हुआ !गर्द गुबार से दबी ढकी उस वीणा से हो रह गए हैं सम्बन्ध और सरोकार जिसकी गर्द ओ गुबार बरसों से हटाई नहीं गई है .

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  18. गुरु शिष्य वाली बात तो अब सपना बन गई है /अब ना गुरु अपना कर्त्तव्य समझतें हैं और ना ही शिष्यों में वो अनुसाशन रहा है /बहुत ही शानदार रचना बहुत बधाई आपको /


    please visit my blog
    www.prernaargal.blogspot.com

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  19. एक दिन
    याद करने की
    परंपरा चल पडी है
    आपको ही नहीं
    माता पिता
    भाई बहन
    मित्र सबको..........
    धन्यवाद कीजिये कि
    भुलाये नहीं गए हैं आप


    हे मेरे प्रथम शिक्षक !
    आपका योगदान
    वैसे ही अप्रत्यक्ष रहेगा
    जैसे गगनचुम्बी ईमारत के नीचे दबी
    नींव की ईंट......
    wah kya likha hai.......bemisaal.

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  20. अरुण जी मेरी राय में ये आपकी सबसे कमजोर कविताएं हैं। रस्‍म अदायगी से बचने की जरूरत है।

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  21. १.
    आपने
    पढाया तो था
    'प' से प्यार
    न जाने
    कब कैसे
    बन गया
    'प' से पैसा
    Aah!
    Waise sabhee kshanikayen sundar hain!

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  22. ये तल्खी.........ये चोट करती रचनाये........अरुण जी हम तो मुरीद हो गए हैं आप के....

    वक़्त मिले तो हमारे ब्लॉग पर भी आयें|

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  23. नमस्कार अरुण जी ...
    शिक्षक दिवस को सार्थक करती सभी रचनाएं एक से बढ़ के एक हैं ... तीसरी वाली बहुत ही खास लगी ...

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  24. waah... awesome... saaree lajawaab...
    meree pasandeeda pahlee waalee... :)

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  25. एक दिन
    याद करने की
    परंपरा चल पडी है
    आपको ही नहीं
    माता पिता
    भाई बहन
    मित्र सबको,
    धन्यवाद कीजिये कि
    भुलाये नहीं गए हैं आप ....



    बहुत सही...

    शायद कुछ समय बाद कोई एक दिन " एथिक्स डे" के रूप में मनाया जाने लगेगा, जिस दिन कि नैतिकता और मानवमूल्यों पर खूब भाषण दिए जायेंगे ....

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  26. भाई अरुण जी कंटेन्ट के स्तर या कहन की शैली में आप कभी निराश नहीं करते बधाई और शुभकामनाएं |

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  27. संक्षेप में बहुत कुछ कहती क्षणिकाएं |मन को छू गयी |बधाई |
    आशा

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  28. सुन्दर क्षणिकाएं, पसंद आई........

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  29. बहुत सुन्दर प्रस्तुति ||

    सादर बधाई ||

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  30. आपने
    पढाया तो था
    'प' से प्यार
    न जाने
    कब कैसे
    बन गया है
    'प' से पैसा...

    वाह !क्या गजब की क्षणिका है ,....लाजवाब !

    .

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  31. हकीकत बयान करती यह पोस्ट अच्छी लगी...शुभकामनायें !!

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  32. चारों ही काव्य रचनाएं शब्द-शब्द संवेदना से भरी एवं अत्यंत सार्थक हैं...

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  33. आपका भी जबाब नहीं अरुण जी.
    गजब का लिखकर हमेशा ही दिल को झिंझोड देते है आप.
    सुन्दर प्रस्तुति के लिए बहुत बहुत आभार.

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