रविवार, 9 अक्तूबर 2011

दूरियां


(अपनी पत्नी के लिए जो सप्ताहभर दूर रही )

दूरियां 
नहीं मापी जाती है
किलोमीटर में
सदैव 

२.
कुछ दूरियाँ 
मापी जाती हैं
दिनों में 
महीनो में
सालों में
युगों में


दूरियाँ 
दिखाई नहीं देती हैं
फिर भी होती है
कई बार

कुछ दूरियाँ
दूरियाँ नहीं होती 
होकर भी 

कुछ दूरियां 
की जाती हैं
महसूस
माप नहीं सकते
आप उन्हें

दूरियां 
लाती हैं 
निकटता 
कई बार 

30 टिप्‍पणियां:

  1. दूरियां
    लाती हैं
    निकटता
    कई बार


    बधाई स्वीकार करें एक नये कांसेप्ट के लिए.... कविता का ये अंदाज़ बहुत अच्छ लगा...

    उत्तर देंहटाएं
  2. दूरियां
    लाती हैं
    निकटता
    कई बार
    सार यही है शायद :).सुन्दर क्षणिकाओं से गूंथी एक माला.

    उत्तर देंहटाएं
  3. दूरियां
    लाती हैं
    निकटता
    कई बार
    Aisee hee duriyaan pyaree hotee hain1

    उत्तर देंहटाएं
  4. दूरियाँ
    दिखाई नहीं देती हैं
    फिर भी होती है
    कई बार
    ... bahut hi badhiyaa

    उत्तर देंहटाएं
  5. कितना कुछ छिपा है इन दूरियों में।

    उत्तर देंहटाएं
  6. दूरियां न हों ,
    तो नजदीकियों का मज़ा क्या होगा.

    बहुत खूबसूरत.
    आपकी बहुमूल्य टिप्पणियों के लिए आभार.

    उत्तर देंहटाएं
  7. कुछ दूरियाँ
    दूरियाँ नहीं होती
    होकर भी
    बहुत खूबसूरत दूरियाँ...

    उत्तर देंहटाएं
  8. दूरियां
    लाती हैं
    निकटता
    कई बार

    सुन्दर अभिव्यक्ति ... हार्दिक बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  9. दूरियां
    लाती हैं
    निकटता
    कई बार

    Bilkul..... Bahut sunder

    उत्तर देंहटाएं
  10. दूरियों
    मे बास होता है
    निकटता का
    और
    निकटता मे प्रायः
    दूरियां नज़र आती हैं.
    संबंधों का
    यही विरोधाभास है.

    बहुत अच्छी प्रस्तुति... अरुण भाई...

    उत्तर देंहटाएं
  11. आप पत्नी जी को दूर जाने का मौका क्यों देते हैं जो दूरियों पर कविता लिखनी पड़े. ये तो खैर अच्छा हुआ कि चलो पत्नी जी वापस आ गयी वर्ना...दूरियां मापने का यन्त्र भी बेकार हो जाता.

    उत्तर देंहटाएं
  12. दूरियों का सिक्सर अच्छा लगा। खास कर अंतिम पढ़कर यह गीत अनायास मुंह से निकल पड़ा, ‘तुमसे दूर रहकर’ ... या फिर ‘दूरियां नज़दीकियां बन गई अज़ब इत्तेफ़ाक़ है।’

    उत्तर देंहटाएं
  13. दूरियाँ
    दिखाई नहीं देती हैं
    फिर भी होती है
    कई बार

    यह दूरियाँ और इनकी महता हर किसी के लिए अलग अलग है और यह स्थिति पर भी निर्भर करता है .....!

    उत्तर देंहटाएं
  14. ''दूरियां लाती हैं निकटता कई बार''
    याद आ रहा है गीत ''दूरियां नजदीकियां बन गई ...''

    उत्तर देंहटाएं
  15. फासले ऐसे भी होंगे यह कभी सोंचा ना था :)............

    उत्तर देंहटाएं
  16. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर भी की गई है!
    अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

    उत्तर देंहटाएं
  17. अल्प शब्दों में विशाल दूरियां समाहित ,निकटता देने को , अच्छा प्रयास ,सुखद ,.... शुक्रिया जी /

    उत्तर देंहटाएं
  18. दूरिओं को परिभाषित करती आपकी रचना पढ़कर किसी का एक शेर याद आ गया.देखिएगा:-
    वो दूर रहके भी मेरे क़रीब लगता है.
    ये फ़ासला भी अजीबो-ग़रीब लगता है.

    उत्तर देंहटाएं
  19. नए अंदाज़ की अद्भुत रचनाएं....
    सादर बधाई....

    उत्तर देंहटाएं
  20. गज़ब का शोध किया है……………बहुत कुछ कह दिया।

    उत्तर देंहटाएं
  21. कुछ दूरियां
    की जाती हैं
    महसूस
    माप नहीं सकते
    आप उन्हें

    ....दूरियों का लाज़वाब विवेचन..एक नया अंदाज़...

    उत्तर देंहटाएं
  22. दूरियाँ
    दिखाई नहीं देती हैं
    फिर भी होती है
    कई बार

    सच कहा...कैसी कैसी होती हैं ये दूरियाँ..

    सुन्दर क्षणिकाएं

    उत्तर देंहटाएं
  23. दूरियां
    नहीं मापी जाती है
    किलोमीटर में
    सदैव.......wah.....kya baat hai.......

    उत्तर देंहटाएं
  24. दूरियां
    लाती हैं
    निकटता
    कई बार
    यकीनन ... बहुत खूब

    उत्तर देंहटाएं
  25. behtarin rachna..ek anokha andaaj..padhne me raas aaya...dil ko bhi behad bhaya...sadar badhayee aaur amantran ke sath

    उत्तर देंहटाएं
  26. दूरियां विभिन्न कोणों से परिभाषित हुई हैं!
    सुन्दर!

    उत्तर देंहटाएं
  27. सुभानाल्लाह ........दूरियों पर हर क्षणिका शानदार थी|

    उत्तर देंहटाएं