शुक्रवार, 14 मार्च 2014

नए नए अवतार



सड़के 
अबकी बार बन जाएँगी 
हर हाथ को मिलेगा रोजगार 
नहीं होंगे दंगे 
बढ़ेगा कारोबार 
आसमान से उतर रहे हैं 
नए नए अवतार 


स्कूल नए खुलेंगे 
नए खुलेंगे कालेज 
जो बीत गया उसको भूलो 
चुनो नया सरकार 
आसमान से उतर रहे हैं 
नए नए अवतार 

धुले पूछे आये हैं सब 
जनता के सेवक सच्चे 
अपराधी नहीं है कोई 
नहीं कोई गुनहगार 
आसमान से उतर रहे हैं 
नए नए अवतार 

देखना अपनी जाति 
छोड़ना न धर्म 
शहर गाँव और रंग को 
बनाना अपना आधार 
आसमान से उतर रहे हैं 
नए नए अवतार 

9 टिप्‍पणियां:

  1. स्वागत है कहाँ थे ?
    हम भी कर रहे हैं इंतजार
    आयें तो सही अवतार :)

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  2. जनता इसी विश्वास पर ५ साल जीती है लेकिन तोड़ देता है विश्वास हर नया अवतार...

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  3. आशाओं की फुहार लेकर आयी यह होली, बाद में तो रंग धोना ही पड़ता है।

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  4. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन संदीप उन्नीकृष्णन अमर रहे - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  5. ये नया अवतार है या नयी पैकेजिंग में पुरानी शराब ...
    आपने के बाद ही पता चलने वाला है ..
    होली कि बधाई ...

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  6. माथे लंबा तिलक लगाये
    रूप धुरंधर बना लिया !
    एक हाथ में रामायण
    दूसरे में डंडा उठा लिया !
    अलख जगाएं हर द्वारे , कुलवान बताये जाते हैं !
    राजनीति में हैं जब से , गुणवान बताये जाते हैं !

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  7. एकदम सही बात लिखी आपने, ऐसा ही कुछ चल रहा है आजकल आसपास...

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  8. लाखों कतार में राष्ट्रभक्त , बैठे हैं, नोट कमाने को !
    इन दिनों राज नेताओं के , धंधे में मन्दा कोई नहीं !

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