शनिवार, 25 अप्रैल 2015

मृत्यु

कैसी होती है मृत्यु
कैसा होता है इसका स्वाद 
क्या होता है इसका कोई रूप भी 
क्या देता है यह निर्वाण 
कैसा सुख है इस  में 
जो करता है  बंधनो से मुक्त 
कितनी पीड़ा देता है  
जो होती है कोई प्रतीक्षा 
या विछोह ही।  

प्रेम भी तो मृत्यु ही है 
रहस्य से भरा 
रहस्यहीन  भी।  

4 टिप्‍पणियां:

  1. मृत्यु का स्वाद तो शायद कोई भी नहीं बता सका.
    सुंदर विचार और सुंदर रचना.

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  2. प्रेम को इस रूप में देखा नहीं अब तक ... अभी तक इसे संजीवनी ही पाया है ...
    गहरा अर्थ देती रचना अरुण जी ... आशा है कुशल मंगल में होंगे ...

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