गुरुवार, 14 जून 2018


उसने मुझे गालियाँ दीं
मैं सुनता रहा
वह मुझे कोस रहा था
मैं सर झुकाए खड़ा था
वह मुझे गिना रहा था अपने एहसान
मैं अपनी उँगलियों पर गिन रहा था

वह भूल गया था कि
उसकी सत्ता में अंश है
मेरे पसीने का भी . 

4 टिप्‍पणियां:

  1. सत्ता पसीना सुखा देती है :) सुन्दर।

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (16-06-2018) को "मौमिन के घर ईद" (चर्चा अंक-3003) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  3. अक्सर यैसा ही होता है
    अच्छी रचना

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