शुक्रवार, 6 फ़रवरी 2026

बसंत

1. 

जंगल काटकर  

बनाये जा रहे हैं राजमार्ग 

और भेजकर रंगबिरंगे सन्देश 

हम मना रहे हैं 

बसंत का उत्सव ! 


2


हमारी बालकनी में 

बसंत टंगा है 

और खेतों में पीली सरसों 

पड रही है पीली 

परदेशी पिया की प्रतीक्षा में ! 


3

झड़ने शुरू हो जायेंगे 

पत्ते 

फेंक दिए जायेंगे 

बुहार कर शहर के बाहर 

कूड़े के ढेर में 

मिटटी से मिलने की उनकी चाहत 

अधूरी रह जायेगी 

इस बार भी . 

गुरुवार, 1 जनवरी 2026

गज़ल : छुपी है धूप

छुपी है धूप है भर गया कोहरा

बिना ज़ुर्म के मैं बन गया मोहरा 


जिम्मेदरियों ने मुझे झुकाया इतना 

पीठ मेरा देखो, ऐसे हो गया दोहरा 


नाराज हो जब, नदी बहाती भी है 

जब भी धार पर लगाया गया पहरा 


पहचानना कठिन है इन दिनों 

किसने चेहरे पे है लगाया चेहरा 


धर्म जाति का शोर हुआ इतना 

न्याय औ' संविधान बन गया बहरा