1.
जंगल काटकर
बनाये जा रहे हैं राजमार्ग
और भेजकर रंगबिरंगे सन्देश
हम मना रहे हैं
बसंत का उत्सव !
2
हमारी बालकनी में
बसंत टंगा है
और खेतों में पीली सरसों
पड रही है पीली
परदेशी पिया की प्रतीक्षा में !
3
झड़ने शुरू हो जायेंगे
पत्ते
फेंक दिए जायेंगे
बुहार कर शहर के बाहर
कूड़े के ढेर में
मिटटी से मिलने की उनकी चाहत
अधूरी रह जायेगी
इस बार भी .
सटीक
जवाब देंहटाएंवाक़ई जीवन की विडंबना यही है
जवाब देंहटाएंBahut hi sundar!!
जवाब देंहटाएंकटु सत्य।
जवाब देंहटाएंबहुत भावपूर्ण अभिव्यक्ति सर।
सादर।
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नमस्ते,
आपकी लिखी रचना मंगलवार १० फरवरी २०२६ के लिए साझा की गयी है
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं।
सादर
धन्यवाद।