शुक्रवार, 6 फ़रवरी 2026

बसंत

1. 

जंगल काटकर  

बनाये जा रहे हैं राजमार्ग 

और भेजकर रंगबिरंगे सन्देश 

हम मना रहे हैं 

बसंत का उत्सव ! 


2


हमारी बालकनी में 

बसंत टंगा है 

और खेतों में पीली सरसों 

पड रही है पीली 

परदेशी पिया की प्रतीक्षा में ! 


3

झड़ने शुरू हो जायेंगे 

पत्ते 

फेंक दिए जायेंगे 

बुहार कर शहर के बाहर 

कूड़े के ढेर में 

मिटटी से मिलने की उनकी चाहत 

अधूरी रह जायेगी 

इस बार भी . 

4 टिप्‍पणियां:

  1. वाक़ई जीवन की विडंबना यही है

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  2. कटु सत्य।
    बहुत भावपूर्ण अभिव्यक्ति सर।
    सादर।
    ______
    नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना मंगलवार १० फरवरी २०२६ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    सादर
    धन्यवाद।

    जवाब देंहटाएं