१
शब्द
अब नही होते
हरे
और जो हरा होता है
होता नही
जीवन
नुक्कड़ के पीपल पर
पीले अमरबेल की
हरियाली
देखने लायक हो गई है !
२
क्या आपने भी
महसूस किया है कि
किताबों
के जिल्द होने लगे हैं
खूबसूरत
और
भीतर के
पृष्टों का खालीपन
गूंजने लगा है !
३
मेरे बच्चे
नही चाहते
मम्मी पापा और अपने लिए
अलग अलग कमरा
परदे लगे बंद दरवाजे
वे चाहते हैं
खुली खिड़की
कि हवा पानी अन्दर आए और
सब मिलकर
गहरी नींद सोयें !
बेटियाँ,
40 मिनट पहले