मंगलवार, 26 अगस्त 2014

औसत बारिश



मेरे गाँव में 
बारिश नहीं हुई 
जब रोपनी हो रही थी 
धान की 

फिर आया 
भीषण बाढ़ 
मेरे गाँव में 
और बह गया 
रहा-सहा धान 

तब भी बारिश नहीं हुई 
जब फूटना था 
बाढ़ से बचे हुए धानों को 

जैसे तैसे धान फूटे 
और कटनी के समय 
बादल बरसा खूब 
मेरे गाँव में 

इण्डिया गेट पर तब 
नहाये खूब बच्चे 
भीगे रूमानी मौसम में खूब जोड़े 
अखबारों ने छापे 
हरे भरे, साफ़ सुथरे वृक्षों के चित्र 
जब माथे पर हाथ धरे 
रो रहे थे मेरे गाँव के किसान 
मौसम विभाग ने बुलाकर प्रेस कांफ्रेंस कहा 
इस साल भी हुई औसत बारिश 

मेरा खलिहान रहा खाली 
जिसका जिक्र नहीं होगा 
किसी रिपोर्ट में ! 

7 टिप्‍पणियां:

  1. वाह .... विचारणीय बात सामने रखती रचना

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  2. मौसम भी इन्सानों की तरह से क्रूर हो गया है।

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  3. जि‍स पांव न फटी बि‍वाई क्‍या जाने वो पीर पराई

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  4. मेरा खलिहान रहा खाली
    जिसका जिक्र नहीं होगा
    किसी रिपोर्ट में !
    बिल्‍कुल सहमत हूँ आपकी इस बात से

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