गुरुवार, 8 जनवरी 2015


नए साल में ब्लॉग की शुरुआत कार्टून से।  बस कोशिश है।  देखते हैं दोस्तों को कैसी लगती है।


11 टिप्‍पणियां:

  1. अच्छी शुरुआत है ... नव वर्ष की मगल कामनाएं ...

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  2. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (09.01.2015) को "खुद से कैसी बेरुखी" (चर्चा अंक-1853)" पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, चर्चा मंच पर आपका स्वागत है।

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  3. क्या करेंगे गाँधी जी ? बईज्जती करवाने आ रहे हैं क्या ?

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    1. सुशील भाई , मेरे प्रयास में कुछ कमी रही है। इस बार गांधी जी के लाठी में कमल का फूल लगा हुआ है। जिस तरह सरकार गांधी गांधी कर रही है, स्वछता से लेकर उनके अफ्रीका से लौटने तक को लेकर, गांधी तो गांधी रह ही नहीं गए हैं. एक और जहाँ उन्ही के लोग गोडसे की मूर्ती लगा रहे हैं, वहीँ उनके प्रधानमंत्री जी गांधी के सपनो का भारत बना रहे हैं , शायद मेरा आशय कार्टून में स्पष्ट नहीं हो सका है।

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    2. अरुण जी आप का प्रयास बहुत सुंदर है । आज तो हर गली में गाँधी हैं । गाँधी एक दुकान में रखी बिकने की वस्तु नहीं हो गई है क्या ? गाँधी को नोट से हटा कर वोट बना दिया है । आपका आशय स्पष्ट है ।

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  4. अच्‍छी शुरूआत है :))
    खट्टी-मीठी यादों से भरे साल के गुजरने पर दुख तो होता है पर नया साल कई उमंग और उत्साह के साथ दस्तक देगा ऐसी उम्मीद है। नवर्ष की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    कभी फुर्सत मिले तो ….शब्दों की मुस्कराहट पर आपका स्वागत है

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  5. गांधी और गोडसे को आजकल रसीदी टिकट की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है...‘‘ताकि सनद रहे और वक्त पे काम आवे।’’

    मारक कार्टून !

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