सोमवार, 16 जनवरी 2017

विमुद्रीकरण



                         

रुपया 
जो कागज़ हो गया 
कागज़ हो गया 
जीवन 
गीला हो रहा है 
जो गीले हो रहे हैं 
नयन।  

सुना है 
रुपया होता है 
कुछ सफ़ेद 
और कुछ काला 
काला रुपया होता है 
गोरे चमचमाते लोगों के पास 
फैक्ट्री की चिमनियों 
बड़ी बड़ी गाड़ियों में 
और सफ़ेद रुपया 
बंधा होता है 
मैली पसीने से गंधाती 
धोती, साडी की अँटियों में।  

उम्मीद और जोश 
भरा है आँखों में 
जब सारा काला रुपया 
सफ़ेद होकर रहेगा 
मैली पसीने से गंधाती 
धोती और साड़ियों की अँटियों में 
अन्यथा विमुद्रीकरण भी 
सरकार की तमाम अन्य नीतियों की भांति 
बनकर रह जायेगा 
एक छद्म।  

5 टिप्‍पणियां: