सोमवार, 3 अगस्त 2026

काकी की चिंता

 फोन आया है काकी का गांव से 

इस बार अषाढ नहीं बरसा 

खेत सब उपटे पडे हैं 

इस बार आम भी नहीं फले थे 

बिना खाद पानी के 


काकी बता रही थी 

इनार तो भर ही गया था 

अब चापाकल भी छोड दिया है 

पानी , सूख गया है . 


हर घर 'नल से जल' वाला नल लग तो गया है 

लेकिन पानी कब आयेगा नहीं पता 

अभी तो गांव में टंकी भी नहीं बना है 


मेरे साथ बचपन में जो लड्का  

करता था नाटक, वह बऔरा गया है 

पंचायत समिति का शिकायत कर दिया था 

कहीं ऊपर और जांच बैठ गई 

उसी समय कोई दारु में कुछ मिला के 

पिला  दिया उसको, कहते हैं लोग 

काकी को नहीं पता है इसका पूरा सच 

हाँ ये जरूर कह्ती है कि 

मुखिया, काउंसिलर, पंचायत समिति का आदमी सब 

चलने लगा है बलेरो से ! 


काकी कहती है 

गांव में घर होना जरुरी है 

साल में दू बार गांव आना जरुरी है 

नहीं तो हो जाते हैं  देवता पितर नाराज 

और कहती हैं देना है पातैर (प्रसाद) 

नये अन्न के आने पर 

लेकिन अभी तक खेत रोपा नहीं गया 

बरखा नहीं हई आषाढ में ! 


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