शुक्रवार, 20 मई 2011

नहीं होकर भी


१.
तुम हो
नहीं हो कर भी
चाँद है
हवा है
 

२ .
तुम हो .  
नहीं होकर भी 
प्यास है
पानी है 

३.
तुम हो
नहीं हो कर भी
सपने हैं
धूप है

४.

तुम हो
नहीं होकर भी
बादल हैं
बारिश है

५.

तुम हो
नहीं होकर भी
दूब हैं
शिलाएं है

५. 

तुम हो
नहीं होकर भी
सांस है
आस है 

35 टिप्‍पणियां:

  1. ये होने और नहीं होने के बीच जो सब कुछ के होने का अहसास है वही इस कविता की सार्थकता है। और जीवन की भी।

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  2. जिस तरह तुम में सब कुछ समां लिया है, बहुत अर्थपूर्ण कविता प्रस्तुत की है.

    --

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  3. वाह! अरुण भाई
    खूबसूरत अहसास
    तुम हो तो नहीं हो कर भी सब कुछ है.
    चंद शब्दों के साथ किन गहराइयों में उतर जाते हैं आप.

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  4. ये सब हैं जिनमें तुम हो ...
    बहुत सुन्दर क्षणिकाएं.

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  5. सघन भाव, सहज अभिव्‍यक्ति.

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  6. सांस है
    आस है
    और क्या चाहिए....सुन्दर क्षणिकाएं..मासूम सी कसक लिए

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  7. बहुत सुन्दर क्षणिकाएं.....खूबसूरत अभिव्‍यक्ति

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  8. बहुत खूब .. रूमानी बना दिया आपने तो

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  9. भाई अरुन जी बहुत सुन्दर क्षणिकाए बधाई

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  10. होने न होने का अहसास अपने आप में होना है।

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  11. होने और नही होने के बीच भी बहुत कुछ होता है जो अपना अहसास करा ही जाता है………सुन्दर भावाव्यक्ति।

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  12. गहरा दर्शन....छोटी बात में.....तुम तो हर जगह हो और कहीं भी नहीं.....सिर्फ देखने वाली आँख का फर्क है .........लाजवाब |

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  13. तुम हो
    नहीं होकर भी
    दूब हैं
    शिलाएं है
    ... भावपूर्ण काव्यपंक्तियों के लिए कोटिश: बधाई !

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  14. बहुत ही खूबसूरत रचना, आपकी लेखनी बहुत कम लफ्जों में बहुत बड़ी बात कह जाती है|

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  15. waha bahut khub............naa ho kar bhi hone ka ehsas ye sach mei bahut khub...bahut khub

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  16. बहुत खूब! बहुत ख़ूबसूरत क्षणिकायें...

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  17. तुम नहीं होकर भी
    सब कुछ हो..
    लाजवाब क्षणिकाएं... गहरा दर्शन...

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  18. बिन तेरे सब सून.............बहुत अच्छे भाई|

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  19. हर बार आपकी कविता में एक नयापन देखने को मिलता है. इस ब्लॉग की कवितायें ये अहसास कराती रहती हैं की "तुम हो".I must appreciate your innovative ideas.
    तुम हो' पढ़ते समय किसी का एक शेर याद आ गया. देखिएगा:-

    जिसको देखा ही नहीं उसको ख़ुदा क्यों मानें,
    और जिसे देख लिया है वो ख़ुदा कैसे हो ?

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  21. प्रकृति की हर शै तुम्हारे होने का अहसास करा रही है।
    बहुत सुंदर लघु कविताएं।

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  22. वाह ....भावपूर्ण...बहुत बहुत सुन्दर...

    आस से ही सांस है का विश्वास देती,मन को छूती सुन्दर सुन्दर शब्द गुल्म......

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  23. बहुत सरल तरीके से आपने कह दिया है....

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  24. तुम में तो सारी सृष्टि ही समां डाली आपने तो ...
    लाजवाब

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  25. और शायद इसीलिए .. तुम हो ... तुम हो और तुम हो .... बहुत लाजवाब हैं सब ...

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  26. बहुत अच्छे अंदाज़ में पेश की गईं क्षणिकाएं.

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