शुक्रवार, 27 अप्रैल 2012

नदी और समय


नदी
रूकती नहीं
समय भी
ठहरता नहीं

नदी
रुकी सी लगती  है
समय भी कई बार
ठहर सा जाता है

समय का  ठहरना
आभासी है
नदी का रुकना भी

नदी चंचल है
समय भी चंचल है 
नदी होती है जिद्दी
रूकती नहीं,  
समय भी 

नदी किनारों से
प्रेम करती है
समय को बस स्वयं से प्रेम है

नदी स्वार्थी नहीं
समय स्वार्थी है

नदी में जो पुल है
वह समय है
समय में जो गति है
वह  नदी ही तो है


27 टिप्‍पणियां:

  1. नदी में जो पुल है
    वह समय है
    समय में जो गति है
    वह नदी ही तो है
    वाह ..बहुत ही बढिया।

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  2. वाह................

    नदी अंत में मिल जाती है सागर से..और समय????
    जाने कहाँ चला जाता है..."भूत" बन जाता है...

    सादर.
    अनु

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  3. नदी और समय ..कुछ एक से कुछ अलग से.

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  4. नदी और समय का तुलनात्मक विवेचन.....शानदार।

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  5. नदी और समय का सुंदर तुलनात्मक नज़रिया ...

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  6. बढ़िया भाव ।

    बधाई ।
    नदी बाँध से बँधे पर, बहता समय अबाध ।
    फिर भी दोनों में दिखे, चंचल साम्य अगाध ।।

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  7. नदी में डूब जाता है
    जिसे तैरना नहीं आता है
    समय मे तैर के अनाड़ी
    भी पार हो जाता है
    दूर कहीं निकल के
    अपनी घड़ी दिखाता है
    नदी को मुंह चिढा़ता है।

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  8. बहुत बढ़िया प्रस्तुति!
    घूम-घूमकर देखिए, अपना चर्चा मंच
    लिंक आपका है यहीं, कोई नहीं प्रपंच।।
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  9. नदी स्वार्थी नहीं
    समय भी नहीं
    नदी कभी कहीं ठहरती नहीं
    रूकती नहीं
    दिशा बदल लेती है
    समय बढ़के भी ठहरा सा लगता है
    समय रास्ते नहीं बदलता हम बदलते हैं .... समय तो आपके साथ है , फिर नदी की तरफदारी क्यूँ :)

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  10. नदी में जो पुल है
    वह समय है
    समय में जो गति है
    वह नदी ही तो है
    Wah! Kya baat kahee hai!

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  11. समय की नदी- में इस कदर बह गया कि सरिता हो गया हूं।
    बस वह पुल जो था कभी आजकल लापता हो गया है।
    कहीं से समय से मांग कर ला दे ताकि दोनों किनारा मिल तो सकें किसी पल।

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  12. बहुत ही खूबसूरती से नदी के साथ आप खुद बहे और हमें भी बहा ले चले अरूण जी । कविता भावप्रद बन पडी है । शुभकामनाएं

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  13. नदी में जो पुल है
    वह समय है
    समय में जो गति है
    वह नदी ही तो है

    नदी और समय कविता के माध्यम से आपने जीवन के गूढ़ सत्यों को प्रकाश में लाया है । नदी का निरंतर बहते रहना एवं पुल का स्थिरावस्था इस बात की ओर इंगित करता है कि जीवन और सम यका एक दूसरे के साथ अन्योनाश्रित संबंध सर्वदा अक्षुण्ण रहता है । मेर पोस्ट पर आकर आपने मेरा मनोबल बढ़ाया है एवं आशा करता हूं कि भविष्य में भी आप अपनी प्रतिक्रियाओं से मेरा मनोबल बढाते रहेंगे । धन्यवाद ।

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  14. कल 02/05/2012 को आपकी इस पोस्‍ट को नयी पुरानी हलचल पर लिंक किया जा रहा हैं.

    आपके सुझावों का स्वागत है .धन्यवाद!


    ...'' स्‍मृति की एक बूंद मेरे काँधे पे '' ...

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  15. नदी में जो पुल है
    वह समय है
    समय में जो गति है
    वह नदी ही तो है...kya behtarin soch hai..nadi ke kinare ke tarah kavita ka kinara bhee khoobsura laga..sadar badhayee aaur amantran ke sath

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  16. दोनों एक जैसी है..
    बहुत अच्छे से रचना में व्यक्त किया है...
    बढ़िया रचना....

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  17. वाह ।
    नदी में जो पुल है
    वह समय है
    समय में जो गति है
    वह नदी ही तो है

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  18. ये तो फ्यूजन हो गया कविता में लेकिन बहुत खूबसूरत लगा!!

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  19. एक दूजे के पूरक होते हुवे भी जुदा हैं कितने ..
    लाजवाब कविता है अरुण जी ... नमस्कार ...

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  20. vaah bina kisi bimb ke ek gahri baat kah dena aur ek darshan ko khol dena , bahut kam kavi kar paate hain aisa.. sundar hai..

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