सोमवार, 16 जुलाई 2012

अंततः



हो जाना है अंत 
सभी आयुधो का

सभी बमवर्षक विमान
धराशायी हो जायेंगे 
बंदूकों की नालियां 
हो जाएँगी बंद 

फौजों के बूटों के 
तलवो में लगी गिट्टियाँ
घिस जाएँगी 
और तोपों के गोले 
हो जायेंगे फुस्स

अंतर की दीवारें 
गिर जाएँगी 
इर्ष्या का धुंआ 
छंट जायेगा 
और सीमाएं सब
ध्वस्त हो जाएँगी 
एक दिन 

बस एक बीज 
जो गया है धरती के गर्भ में 
अंकुरित होगा अंततः 

किन्तु एक युद्ध के बाद 
जो कहीं से भी  नहीं है
अपरिहार्य

21 टिप्‍पणियां:

  1. अंतर की दीवारें
    गिर जाएँगी
    इर्ष्या का धुंआ
    छंट जायेगा
    और सीमाएं सब
    ध्वस्त हो जाएँगी
    एक दिन
    Bahut,bahut sundar!

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  2. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  3. और छोटे छोटे
    युद्ध जो हम
    लड़ने से
    बचतें हैं
    फिर नहीं होंगे
    हमारे सामने
    उस एक युद्ध
    के बाद

    साधुवाद !!!!

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  4. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि-
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल मंगलवार (17-07-2012) को चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  5. भरपूर आशावाद आनंददायी होता है.
    सुखद कल्पनाएँ .... अनायास घेरने वालों तनावों से दूर रखती हैं.
    साधु.

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  6. अंतत: होना तो यही है लेकिन तब जब सब ध्वस्त हो चुका होगा ... गहन चिंतन

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  7. सभी बमवर्षक विमान
    धराशायी हो जायेंगे
    बंदूकों की नालियां
    हो जाएँगी बंद
    sarthak likha hai aapne .aabhar

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  8. बहुत सुंदर लिखा है ...
    बधाई ..इस रचना के लिये ...!!

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  9. क्या कहने अरुण जी , बहुत सुंदर
    आपको पढना वाकई सुखद अनुभव है।

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  10. सुंदर रचना के लिए बधाई। मेरे नए पोस्ट 'अतीत से वर्तमान तक का सफर पर" आपका हार्दिक अभिनंदन है । धन्यवाद।

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  11. बस एक बीज
    जो गया है धरती के गर्भ में
    अंकुरित होगा अंततः

    यही तो नव सृजन का नयी सृष्टि का अंकुर होगा।

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  12. होनी को कोई रोक नहीं सकता ... बस समय का इंतज़ार है ...

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  13. भावमय बेहतरीन प्रस्तुति,,,,,

    पोस्ट पर आने के लिए आभार,,,,,,,

    RECENT POST ...: आई देश में आंधियाँ....

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  14. समझने की कोशिश कर रहा हूं कि यह कौन सा बीज है। तब तक तो संशय बना ही रहेगा कि यह बीज पल्लवित पुष्पित होगा भी या महीं।

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  15. पता नहीं युद्ध के अतिरिक्त कोई उपाय है कि नहीं।

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