१.
ईश्वर की
होती है जो इच्छा
वह कर लेता है
उसके पास समय हैं
संसाधन हैं
बल है
छल है
बहाने हैं
क्योंकि वह ईश्वर है
२.
इधर
ईश्वर
नहीं सुनता है
प्रार्थनाएं
चीखें
अनुनाद
अनुरोध
क्योंकि
ईश्वर होता जा रहा है
निरंकुश
३.
जब तक
ईश्वर को
मालूम है कि
सुरक्षित है
उसकी सत्ता
ईश्वर
रहेगा ऐसा ही
बहुत सुंदर !
प्रत्युत्तर देंहटाएंहाँ कुछ हो तो रहा है
ईश्वर को !
क्या परेशानी है
चलो हम तुम भी
ईश्वर हो जाते हैं
अपनी सत्ता अपने
आप चलाते हैं
कायम रहेगी
प्रत्युत्तर देंहटाएंईश्वर की सत्ता
सदा..
मिटा देता है वो
नास्तिकों को.
सादर
अनु
वाह ... बेहद सशक्त भाव अनुपम प्रस्तुति।
प्रत्युत्तर देंहटाएंनिरंकुशता को रोकने के लिए ईश्वर का भय होना ज़रूरी है और जब तक भय है तब तक ईश्वरकी सत्ता है .... सुंदर अभिव्यक्ति
प्रत्युत्तर देंहटाएंबहुत बढ़िया प्रस्तुति!
प्रत्युत्तर देंहटाएंआपकी प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (28-07-2012) के चर्चा मंच पर लगाई गई है!
चर्चा मंच सजा दिया, देख लीजिए आप।
टिप्पणियों से किसी को, देना मत सन्ताप।।
मित्रभाव से सभी को, देना सही सुझाव।
शिष्ट आचरण से सदा, अंकित करना भाव।।
क्या कहूँ इस रचना के लिये ………ईश्वर को माध्यम बनाकर बहुत गहरी बात कह दी………आज के हालात का सटीक चित्रण कर दिया
प्रत्युत्तर देंहटाएंSAHAJ BHAVABHIVYAKTI KE LIYE AAPKO BADHAAEE
प्रत्युत्तर देंहटाएंAUR SHUBH KAMNAAYEN .
बहुत सुन्दर रचना, बधाई.
प्रत्युत्तर देंहटाएंअरुण जी विरोध के लिये ईश्वर को ही माध्यम बनाने का यह आग्रह क्यों । विरोध के लिये और भी तो कितना कुछ है । फिर भी कविता अच्छी है ।
प्रत्युत्तर देंहटाएंगिरिजा जी, आपके इस प्रश्न पर मुझे सगीना माहतो का गया गीत बरबस याद आ गया, शायद वह भी एक उत्तर हो इस प्रश्न का --
हटाएं“ऊपर वाला दुखियों की नाही सुनता रे!
कौन है जो उसको गगन से उतारे!!?”
शायद इसीलिए मुझे इन पर भरोसा ही नहीं रहा ...
प्रत्युत्तर देंहटाएंआभार !
होता वही जब चाहता, जो ईश्वर की मर्जी
प्रत्युत्तर देंहटाएंजतन चाहे जितना करो,लाख लगाओ अर्जी,,,,
RECENT POST,,,इन्तजार,,,
ईश्वर पर भी पॉवर का असर होना ही है.
प्रत्युत्तर देंहटाएंसर्वशक्तिमान जो है वो..... बहुत सुंदर
प्रत्युत्तर देंहटाएंbahut sunder
प्रत्युत्तर देंहटाएंइंसान... ईश्वर बनने की कोशिश करेगा तो यही होगा....
प्रत्युत्तर देंहटाएंसादर !!!
सशक्त क्षणिकायेँ....
प्रत्युत्तर देंहटाएंसादर।
गहन और शानदार।
प्रत्युत्तर देंहटाएंअरुण जी,आपके ब्लॉग पर देरी से आने के लिए पहले तो क्षमा चाहता हूँ. कुछ ऐसी व्यस्तताएं रहीं के मुझे ब्लॉग जगत से दूर रहना पड़ा...अब इस हर्जाने की भरपाई आपकी सभी पुरानी रचनाएँ पढ़ कर करूँगा....कमेन्ट भले सब पर न कर पाऊं लेकिन पढूंगा जरूर
प्रत्युत्तर देंहटाएंजब तक
ईश्वर को
मालूम है कि
सुरक्षित है
उसकी सत्ता
ईश्वर
रहेगा ऐसा ही
वाह...अद्भुत रचना...बधाई स्वीकारें
नीरज
ईश्वर ईश्वर है, उस पर किसका जोर है।
प्रत्युत्तर देंहटाएंईश्वर के सिंघासन को चुनौती दे डाली इस रचना से.
प्रत्युत्तर देंहटाएंबधाई.
इसको यूं कहें कि आज के दौर में जिसमें
प्रत्युत्तर देंहटाएंबल है
छल है
बहाने हैं
वह ईश्वर है
या फिर ये कहें कि
प्रत्युत्तर देंहटाएंजो होता जा रहा है
निरंकुश
वह ईश्वर है
या फिर यह मान लें
प्रत्युत्तर देंहटाएंकि
सुरक्षित है
सत्ता
इसलिए वह अपने को
ईश्वर
समझ बैठा है
इसको यूं कहें कि आज के दौर में जिसमें
प्रत्युत्तर देंहटाएंबल है
छल है
बहाने हैं
वह ईश्वर है
total agreed with SHRI MANOJ KUMAR BHAIYA
क्या खूब कहा है.. एक तरफ़ा बल हानिकारक है.. चाहे वो इश्वर के पास ही क्यों न हो..
प्रत्युत्तर देंहटाएंईश्वर तो ईश्वर है सर्वोपरि माना जाता है..अद्भुत रचना..मेरे ब्लांग मेंआने केलिए आभार..
प्रत्युत्तर देंहटाएंबहुत खूब ... इंसान ही है जो ईश्वर की भी सत्ता बनाता है ... उसे अपना भगवान बनाता है और वो जड़ हो जाता है उसी रूप में ... गहरी सोच से उपजी रचना ...
प्रत्युत्तर देंहटाएं