शुक्रवार, 6 सितंबर 2013

अफगानिस्तान

(यह कविता २०१० में लिखी थी।  अफगानिस्तान के बारे में जो छवि है , बस इतनी भर यह कविता थी।  आज सुष्मिता बनर्जी की तालिबान द्वारा की गई हत्या इस कविता को पुष्ट करती है।  लेखिका सुष्मिता के श्रधांजलि स्वरुप यह कविता फिर प्रस्तुत है।  ) 










भूगोल की किताबों में 
जरुर हो तुम एक देश
किन्तु वास्तव में
तुम अफगानिस्तान
कुछ अधिक नहीं
युद्ध के मैदान से

दशकों बीत गए
बन्दूक के साए में
सत्ता और शक्ति
परिवर्तन के साथ
दो ध्रुवीय विश्व के
एक ध्रुवीय होने के बाद भी
नहीं बदला
तुम्हारा प्रारब्ध 
काबुल और हेरात की 

सांस्कृतिक धरोहर के
खंडित अवशेष पर खड़े
तुम अफगानिस्तान
कुछ अधिक नहीं
रक्तरंजित वर्तमान से

बामियान के
हिम आच्छादित पहाड़ों में
बसे मौन बुद्ध
जो मात्र प्रतीक रह गए हैं
खंडित अहिंसा के
अपनी धरती से
विस्थापित कर तुमने
गढ़ तो लिया एक नया सन्देश
तुम अफगानिस्तान
कुछ अधिक नहीं
मध्ययुगीन बर्बरता से

जाँची जाती हैं
आधुनिकतम हथियारों की
मारक क्षमता
तुम्हारी छाती पर
आपसी बैर भुला
दुनिया की शक्तियां एक हो
अपने-अपने सैनिको के
युद्ध कौशल का
देखते हैं सामूहिक प्रदर्शन
लाइव /जीवंत
तुम अफगानिस्तान
कुछ अधिक नहीं
सामरिक प्रतिस्पर्धा से

खिड़कियाँ जहाँ
रहती हैं बंद सालों  भर
रोशनी को इजाजत नहीं
मिटाने को अँधेरा
बच्चे नहीं देखते
उगते हुए सूरज को
तितलियों को
फूलों तक पहुँचने  की
आज़ादी नहीं
हँसना भूल गयी हैं
जहाँ की लडकियां
तुम अफगानिस्तान
कुछ अधिक नहीं
फिल्मो/ डाक्युमेंटरी/ रक्षा अनुसन्धान के विषय भर से 

सदियों से चल रहा
यह दोहरा युद्ध
एक -दुनिया से
और एक- स्वयं से

अफगानिस्तान
सूरज को दो अस्तित्व कि
मिटा सके पहले भीतर का अँधेरा
खोल दो खिड़कियाँ
तुम अफगानिस्तान
इस से पहले कि
मिट जाए अस्तित्व
भूगोल की किताबों  से 

24 टिप्‍पणियां:

  1. बेहद सशक्त और मर्मस्पर्शी रचना......
    सुष्मिता जी की हत्या एक बेहद दुखद और झकझोर देने वाली घटना है...

    सादर
    अनु

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  2. तुम अफगानिस्तान
    कुछ अधिक नहीं
    फिल्मो/ डाक्युमेंटरी/ रक्षा अनुसन्धान के विषय भर से \

    वाकई इन कट्टरताओं ने जीवन का मज़ाक बना कर रख दिया है ! अनूठी रचना , बधाई अरुण !

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  3. बहुत सुन्दर प्रस्तुति.. आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी पोस्ट हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल में शामिल की गयी और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा {रविवार} 8/09/2013 को मैं रह गया अकेला ..... - हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल - अंकः003 पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें। कृपया आप भी पधारें, आपके विचार मेरे लिए "अमोल" होंगें | आपके नकारत्मक व सकारत्मक विचारों का स्वागत किया जायेगा | सादर ....ललित चाहार

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  4. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति शनिवारीय चर्चा मंच पर ।।

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  5. बहुत ही सार्थक रचना.......
    सुष्मिताजी की हत्या अफगानिस्तान के बर्बरता का प्रतिक है .

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  6. बहुत ही सार्थक रचना.......
    सुष्मिताजी की हत्या अफगानिस्तान के बर्बरता का प्रतिक है .

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  7. बहुत ही सार्थक रचना
    सुष्मिताजी की हत्या अफगानिस्तान के बर्बरता का प्रतिक है ....

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  8. भूगोल की किताबों भर में ही एक देश है जो उसकी स्थितियों परिस्थितियों का विशुद्ध आकलन!

    लेखिका सुष्मिता जी को श्रद्धांजलि!

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  9. सटीक और साथक अभिव्यकित जो वर्त्तमान सच को उजागर करती है
    latest post: सब्सिडी बनाम टैक्स कन्सेसन !

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  10. खोल दो खिड़कियाँ
    तुम अफगानिस्तान
    इस से पहले कि
    मिट जाए अस्तित्व
    भूगोल की किताबों से ...

    बहुत ही सशक्त पंक्तियाँ ....

    लेखिका सुष्मिता को श्रद्धांजलि ....!!

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  11. बहुत ही शानदार ! आज सुष्मिता बैनर्जी की बर्बर ह्त्या ने इस रचना की प्रासंगिकता को दृढ़ता से स्थापित किया है ! वाकई विश्व के नक़्शे पर एक देश का नाम भर रह जाने के आलावा अन्य कोई पहचान नहीं रह गयी है अफगानिस्तान की ! काश उदारता और सहिष्णुता की, चाहे धीमी ही हो, एक हल्की सी बयार वहाँ भी पहुँच जाये !

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  12. एक सुंदर देश के सुंदर लोगों का दुर्भाग्‍य है...

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  13. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन अब रेलवे ऑनलाइन पूछताछ हुई और आसान - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  14. बहुत सुन्दर प्रस्तुति.. आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी पोस्ट हिंदी ब्लॉग समूह में सामिल की गयी और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा - रविवार-8/09/2013 को
    समाज सुधार कैसे हो? ..... - हिंदी ब्लॉग समूह चर्चा-अंकः14 पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया आप भी पधारें, सादर .... Darshan jangra





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  15. ये बहुत ही बेहतरीन कविता लिखी है आपने!

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  16. शायद कोई श्राप गसित क्षेत्र है जहां कितने दशकों से मानवता की बलि दि जा रही है ...

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  17. ये हर उस देश का दुर्भाग्य है ...जहाँ बेगुनहा मारे जाते हैं ...झंझोरती हुई कविता

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  18. लाजबाब रचना ..ताजगी से भरी हुई ..अफगान की सच्ची तस्वीर दिखती शानदार रचना ..हार्दिक शुभकामनाओं के साथ

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  19. समूचे देश का कैसा हश्र है ..... बेहतरीन रचना ।

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  20. समूचे देश का कैसा हश्र है ..... बेहतरीन रचना ।

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  21. इस से पहले कि
    मिट जाए अस्तित्व
    भूगोल की किताबों से
    ............बेहद सशक्त !

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