बुधवार, 24 जून 2015

अँधेरे का रंग





अँधेरा 
हरे रंग का होता है 
देख रहा हूँ मैं 

अँधेरा 
होता है 
मासूम नई पत्तियों की तरह  
महसूस कर रहा हूँ मैं 


अँधेरा 
हँसता है 
खिलखिला कर 

अँधेरा 
फुसफुसाता है 
कानो में 

सुन रहा हूँ मैं ! 

8 टिप्‍पणियां:

  1. प्रेरक प्रस्तुति - जिन खोजा तिन पाइया

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  2. हमारे देश में तो अंधेरा होता नहीं है ।:)

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  3. अँधेरे में गहरा मतलब खोजती रचना ...
    बहुत खूब ...

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  4. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, जीना सब को नहीं आता - ब्लॉग बुलेटिन , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  5. अंधेरे गर्भ में ही जीवन का अंकुर प्रस्फुटित होता है।

    शब्द सरल, भाव गहन !

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  6. खूब , अँधेरा भी अपना अस्तित्व रखता है

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