शुक्रवार, 17 जुलाई 2015

बदलाव



बदल दिए जायेंगे 
सड़को के नाम 

किताबो में 
ठूंस दिए जायेंगे 
नए अध्याय 

नदियों को 
खोद निकाला जायेगा 
अतीत से 

अलंकृत होंगे 
नए नए सेनानी 

गढ़े जाएंगे 
नए नए साहित्य 
शब्दों के नए नए अर्थ 

ग्रह , नक्षत्र , पृथ्वी की गति 
सब के सब निर्धारित होंगे 
नए सिरे से 

देखते रहना तुम 
होंगे बड़े बड़े बदलाव 
अपने इस देश में 

जिसमे शामिल नहीं होंगे 
तुम, मैं, हम सब ! 

6 टिप्‍पणियां:

  1. तुम मैं हम सब शामिल हैं तो सही भारत में
    इंडिया में शामिल होना है तो कुछ अलग करो ना :)

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (19-07-2015) को "कुछ नियमित लिंक और एक पोस्ट की समीक्षा" {चर्चा अंक - 2041} पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  3. बहुत अच्छे शब्दों से बुना गया है

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  4. बदलाव ही प्रकृति का नियम है. सुंदर पेशकश.

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  5. बदलाव इतने हो चुके हैं की अब बदलाव कुछ भी लगता नहीं ... क्या सच क्या झूठ ये भी पता नहीं ...

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