गुरुवार, 9 मार्च 2017

अश्लीलता

अब अश्लीलता का रंग 
ब्लू नहीं होता 
अब यह सिमटा नहीं 
पीली पन्नी में 
न ही सिनेमा घरों में होता है 
इनका नियत समय , देर रात या सुबह सवेरे 
जहाँ जाने से भय और शर्म खाते हों लोग।  

अब इसकी घुसपैठ है 
दिल में, दिमाग में  
पूरी रंगीनियत के साथ 
यह समय है 
सामूहिक अश्लीलता का ! 

4 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" शुक्रवार 10 मार्च 2017 को लिंक की गई है.... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  2. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन ’आओगे तो मारे जाओगे - ब्लॉग बुलेटिन’ में शामिल किया गया है.... आपके सादर संज्ञान की प्रतीक्षा रहेगी..... आभार...

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  3. बहुत सुन्दर और सटीक अभिव्यक्ति...

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