मंगलवार, 30 अप्रैल 2019

घृणा



घृणा से उपजी ऊर्जा से 
पिघला कर इस्पात 
बनती हैं तलवारें, बंदूकें 
बम्ब और बारूदें 
बम वर्षक विमानें 
मरते हैं आदमी 
मरती है आदमीयता 

तुम ऐसा करना 
तुम्हारे भीतर जो हो किसी से घृणा 
उसे शब्दों में देना ढाल 
देखना बनेगी 
दुनिया की सबसे खूबसूरत कविता 

कवितायेँ नहीं करती 
रक्तरंजित इतिहास 
वे तिनका हो जाती हैं 
जब डूब रही होती हैं मानवता।    

11 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (01-05-2019) को "संस्कारों का गहना" (चर्चा अंक-3322) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. ब्लॉग बुलेटिन की दिनांक 30/04/2019 की बुलेटिन, " राष्ट्रीय बीमारी का राष्ट्रीय उपचार - ब्लॉग बुलेटिन “ , में आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  3. अच्छा लगा !किसी ने तो समझी मन की उलझन

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  4. कवितायेँ नहीं करती
    रक्तरंजित इतिहास
    वे तिनका हो जाती हैं
    जब डूब रही होती हैं मानवता।
    बेहतरीन रचना ,सादर नमस्कार

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  5. कवितायेँ नहीं करती
    रक्तरंजित इतिहास

    मानवता को उबारने के लिये कविताए दायित्व निर्वहन को तत्पर हो जाती है
    शानदार अभिव्यक्ति

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  8. बहुत अच्छा लिखा है आपने

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