बुधवार, 15 जुलाई 2026

सितम्बर की भूख



(निकोल सेसिलिया डेलगाडो  की स्पेनिश कविता सेप्टिहैम्ब्रे
स्पैनिश से  अंग्रेजी अनुवाद: कैरिना डेल वैले शोर्स्के )

अगस्त और समुद्र में नौकायन के मौसम के बीच
मेरे शहर  में सब कुछ जैसे ठहर-सा जाता है
ज़्यादातर दुकानें बंद हो जाती हैं
और रोक लगी होती है मछली, केकड़े और शंख पकड़ने पर।  

मछुआरे रविवार का समय 
खुले समुद्र तट पर
कराओके साल्सा के पुराने गाने गाकर बिताते हैं,
उनकी आवाज़ में असर झलकता है
खारे पानी और हालात से समझौता करने का ।

समुद्री घास  को आराम मिलता है,
 वह फिर से पनपती है
समुद्र की तलहटी किसी नियॉन रोशनी वाली दावत जैसी लगती है।
एल्कहॉर्न कोरल खिल उठते हैं, 
कछुए धीरे धीरे आ जाते हैं किनारों के पास।  

लेकिन समुद्र तट पर ख़लती  है  
लोगों को कमी ।

अच्छी बात यह है कि
फलों के पेड़ खूब फलते-फूलते हैं।
स्थानीय लोग केले, ब्रेडफ्रूट और हरे केले का 
लेन-देन करते हैं।
इस बीच बहुत अच्छी हुई इस साल एवोकैडो की फ़सल 
और आ सकता है कभी भी तूफ़ान ।

अंग्रेजी से हिंदी अनुवाद : अरुण चंद्र राय

बुधवार, 8 जुलाई 2026

बर्फ़ीले तूफ़ान के बीच स्वादिष्ट व्यंजन बनाते हुए कुछ विचार

 बर्फ़ीले तूफ़ान के बीच स्वादिष्ट व्यंजन बनाते हुए कुछ विचार


येसेनिया मोंटिला



मैं अपने जीवन शानदार चीज़ों से घिरी रहना चाहती हूँ, 
किन्तु सुंदरता तो पूँजीवाद है
यानी मुझे चीज़ों से प्यार करना 
'खरीदने की क्षमता' के ज़रिए सिखाया गया था,
और अब मैं एक ऐसे देश में हूँ 
जहाँ ज़िंदगी बस दिखावा और गुलाब है, 
रोटी कभी नहीं।

मैं एक पूरे गाँव का पेट कैसे भरूँ 
जब मेरी एकमात्र काबिलियत 
अपने लिए शानदार और सूंदर चीज़ें जमा करना है, 
न कि उन्हें बाँटना? 
हे भगवान, मैं कितनी गलत थी कि 
मैंने हथियारों के बजाय कपड़े 
और खेती के बजाय कविता की किताबें चाहीं। 

मेरा प्रेमी अपने बगीचे से 
मुझे काजू और बादाम भेजता है
और मैं उन्हें गौर से देखती हूँ, 
यह सोचकर कि धरती की कोख से 
फसल उगाने का एहसास कैसा होता होगा
मिट्टी में सने मेरे हाथ 
रस्सी बनकर 'अच्छाई' को खींचते हैं 
और माफ़ी माँगते हैं धरती से ।

 वे हमें मार रहे हैं और 
हम सब बस ऑफिस जा रहे हैं,
 टीवी देख रहे हैं 
बाहर से खाना मँगवा रहे हैं
कई बार लगता है कि  
मुझे तो विरोध करना चाहिए था।

मौतें बर्फ़ की तरह जमा होती जाएँगी 
और हम सबको क्रांति के लिए अपनी जान देनी पड़ेगी। 
मैं थक गई हूँ यह सुनकर कि 
यह सब पेचीदा है, जटिल है
और आज संभव नहीं है।  

वे कहते हैं कि इसका सम्बन्ध पैसे और ताकत से है, 
लेकिन वे हमसे चाहते हैं कि हम भुला दें कि  
हम प्यार कैसे करते हैं
प्यार किससे करते हैं
और प्यार क्यों करते हैं ।  

बर्फीले तूफ़ान के बीच 
वे चाहते हैं कि 
हम घर के अंदर रहकर
अच्छे अच्छे व्यंजन बनायें 
और बाहर चाहे लोग गोली से मरते रहें
हम चुप रहें ! 

(अनुवाद : अरुण चंद्र राय ) 

येसेनिया मोंटिला एक एफ्रो-लैटिना कवयित्री, शिक्षिका, संपादक और अनुवादक हैं। उन्होंने ड्रू यूनिवर्सिटी से कविता और कविता-अनुवाद में एमएफए की डिग्री हासिल की है। वे न्यूयॉर्क में रहती हैं।  

बुधवार, 29 अप्रैल 2026

सभ्यता को नष्ट करने की जिद्द

 सभ्यता को नष्ट करने की जिद्द पाले

वे लहराना चाहते हैं अपना झंडा

पहाड़ों पर

रेगिस्तानों में

समुद्रों में

जलडमरू मध्य में 

समुद्र की लहरों के नीचे

और आसमान में 

जो कि उनका है ही नहीं ! 


यह जो झंडा लहराना चाहते हैं

वह रंगा हुआ है 

बच्चो, महिलाओ के शोणित से 

झुलसा हुआ है 

स्कूलो, देवालयो  से धधकते  लपटों से 

फिर भी वे लहराना चाहते हैं अपना झंडा 

पहाड़ो पर, रेगिस्तान में, समन्दर में और आसमान पर !

वे घोषणा करते हैं कि उनका झंडा 

करता है प्रतिनिधित्व 

बुद्ध, मर्टिन लूथर किंग, गांधी और मंडेला का !


रविवार, 5 अप्रैल 2026

युद्ध में भूख

 जब दुनिया में चल रहा हो

युद्ध

भूख और प्यार का जिक्र करना है

देश को कमजोर करना ! 


जब आसमान में विचर रहे हों

बंबवर्षक विमान

खेतों में खड़ी फसल को बचाने की प्रार्थना करना है

देशद्रोह, जिसके लिए हो सकती है सजा भी !


सेना की भर्ती खुली है

बीच युद्ध के दौरान

और इसमें भर्ती होने से मना करना 

राष्ट्र के लिए कर्तव्य की अवहेलना है

जबकि रोजगार के अवसर भेंट चढ़ गए हैं

युद्ध के उन्माद के ! 


युद्ध लड़ती तो सेना है 

फिर भी इसके प्रभाव से कहां बचा रह सकता है

किसान, मजदूर, स्त्री और बच्चे ! 

शुक्रवार, 6 फ़रवरी 2026

बसंत

1. 

जंगल काटकर  

बनाये जा रहे हैं राजमार्ग 

और भेजकर रंगबिरंगे सन्देश 

हम मना रहे हैं 

बसंत का उत्सव ! 


2


हमारी बालकनी में 

बसंत टंगा है 

और खेतों में पीली सरसों 

पड रही है पीली 

परदेशी पिया की प्रतीक्षा में ! 


3

झड़ने शुरू हो जायेंगे 

पत्ते 

फेंक दिए जायेंगे 

बुहार कर शहर के बाहर 

कूड़े के ढेर में 

मिटटी से मिलने की उनकी चाहत 

अधूरी रह जायेगी 

इस बार भी .