शनिवार, 20 फ़रवरी 2021

मातृभाषा

 अरुण चन्द्र रॉय की कविता - मातृभाषा 

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मेरी मातृभाषा में 

नहीं है

सॉरी, थैंक यू

धन्यवाद, आभार जैसे 

शब्द। 


मातृभाषा में बोलना 

होता है जैसे 

मां  छाती से लिपट जाना

माटी में 

लोट जाना


जब छूट  रही है मिट्टी, मां

और मातृभाषा 

हर बात के लिए

जताने लगा हूं आभार

कहने लगा हूं धन्यवाद

औपचारिक सा हो गया हूं। 


- अरुण चन्द्र रॉय

बुधवार, 6 जनवरी 2021

राजा के लिए एक कविता

अरुण चन्द्र रॉय की कविता - राजा के लिए
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यदि राजा को 
सैकड़ों सैनिकों के पहरे में 
नींद नहीं आये तो 
उसे आ जाना चाहिए फुटपाथ पर 
सो जाना चाहिए किसी बेघर के पास 
यकीन मानिये 
वर्षों बाद आएगी राजा को ऐसी नींद  

यदि राजा को 
नहीं पचता हो खाना 
बनता हो पेट में गैस 
आती हो खट्टी डकारें 
उसे पैदल बाजार में निकल जाना चाहिए 
बिना किसी तामझाम के 
देख आना चाहिए कैसे मशक्क्रकत करती है 
उसकी जनता 
यकीन मानिये 
राजा को पचेगा खाना . 

यदि राजा को लगता हो कभी 
अकेलापन 
उसे बिना किसी झिझक के 
बैठ जाना चाहिए किसी रेल डिब्बे में 
बिना किसी आरक्षण के 
कर लेनी चाहिए अपने दिल की बात 
किसी अनजान से 
जो उससे पहले कभी नहीं मिला 
जो उससे बाद में शायद ही कभी मिले 
यकीन मानिये 
राजा फिर कभी महसूस नहीं करेगा 
अकेलापन . 

राजा 
बेहतर राजा बन सकता है 
यदि बन जाए वह
हाड-मांस का आम आदमी 
जैसा था कभी वह राजा बनने से पहले . 

रविवार, 3 जनवरी 2021

किसान

मिट्टी से खेलता हूं
मिट्टी में पलता हूं
किसान हूं मैं
मिट्टी में मिल जाता हूं। 

मिट्टी से शुरू कहानी
मिट्टी में खत्म होती है
किसान हूं मैं
मिट्टी के गीत गाता हूं
मिट्टी में मिल जाता हूं। 

मिट्टी मेरे खून में
मिट्टी मेरी धमनियों में
किसान हूं मैं
मिट्टी की सांसें लेता हूं
मिट्टी में मिल जाता हूं। 

शनिवार, 2 जनवरी 2021

मेरी रनिंग डायरी

 नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें . 

यह साल सबके लिए बेहतर स्वास्थ्य लाये . सब स्वस्थ रहें . खुश रहें . पिछले साल कोरोना ने बता दिया कि सेहत बड़ी नेमत कुछ और नहीं है . स्वास्थ्य सबसे मूल्यवान संपत्ति है . ऐसा इसलिए भी हुआ कि जब लाखों मजदूर शहर से गाँव की तरफ पलायन कर रहे थे तब कोरोना का संक्रमण सबसे अधिक तेजी से फ़ैल रहा था और पूरा देश अपने घरों में दुबका पड़ा हुआ था . इसने यह भी साबित किया कि गरीब और मजदूर को हम जितना कमजोर और कुपोषित समझते हैं , वे वास्तव में उससे कहीं अधिक मज़बूत हैं . मजदूरों ने हजारों किलोमीटर पैदल चलने का जज्बा दिखा कर देश के उच्च वर्ग को शर्मिंदा कर दिया जो बिना सुविधाओं के रहना भूल चुके हैं . 

यह वह समय था जब अपने खराब सेहत को सुधारने के लिए रनिंग को अपनाए हुए साल भर भी नहीं हुआ था . लेकिन मैंने कोरोना के भर को एक तरफ रखते हुए पूरे लॉक डाउन के दौरान खाली सड़कों पर रनिंग की, पैदल चला और खुद को फिट रखने की कोशिश की . 

बीता हुआ साल यानी 2020 इस लिहाज से मेरे लिए एक बेहतर साल रहा क्योंकि इस साल भर में मैं लगभग 2100 किलोमीटर दौड़ा . 365 दिनों में से मेरी एक्टिविटी लगभग 250 दिनों की रही . इस पूरे साल में मैं 13 हाफ मैराथन और 1 फुल मैराथन रेस दौड़ा . 

फुल मैराथन की कहानी फिर कभी अलग से . लेकिन जिस तरह मजदूरों ने विषम परिस्थिति में हजारों किलोमीटर की यात्रा करके अपने गाँवों को लौटे, उसके सामने मेरी मैराथन दौड़ कुछ भी नहीं है . 

अपने रनिंग डायरी के पन्ने से कहानियां लेकर बीच बीच में आऊंगा , इसी ब्लॉग पर . 

आप भी दौडिए और खुद को फिट रखिये . क्योंकि स्वस्थ शरीर से बड़ी कोई संपत्ति नहीं . जब प्रलय आएगा तो केवल शरीर ही आपको बचाएगा . 

 आज नए साल में २०२१ किमी दौड़ने के संकल्प के साथ पहले दिन शीतलहर के बीच दौड़ा और चौदह किलोमीटर दौड़ा . आप भी मेरे साथ दौडिए ! 

चल दौड़ दौड़ तू दौड़ दौड़ 

गाँव शहर या को भी ठौर 

चल दौड़ दौड़ तू दौड़ दौड़ . 


गुरुवार, 31 दिसंबर 2020

विदा 2020

 साल तुम जाओ अब 

जाते हुए तुम लेते जाओ 

सब उदासियाँ और अँधेरे 


मजदूरों की बेकारी लेकर जाओ

जाओ लेकर किसानों से साथ होने वाला 

विश्वासघात 

मशीनों के पुर्जों की घिसान भी लेकर जाना 

और लेकर जाना अबोलापन और अकेलापन 

आदमी और आदमी के बीच का . 


धर्म भी लेते जाओ तुम साथ अपने 

लेते जाओ तुम घृणा भी 

क्योंकि इनके बिना आदमी लागता है 

अधिक आदमी , अधिक मानवीय 


न जाने कितने पेड़ हमने काटे दुनिया भर में 

लाखों एकड़ जंगल जलने के कारण बने हम 

हो सके तो ले जाओ तुम अपने साथ 

दुनिया भर की वे मशीने जो 

जमीदोज करती हैं पेड़ पहाड़ पर्यावरण .


जाते हुए साल तुम साथ लेजाओ 

सब बीमारियाँ , सब रुदन 

छोड़ जाओ थोडा रंग बच्चों के मन में 

कुछ अच्छे बीज मानवता के जिन्हें उगा 

नए साल को हम बना सकें हरा-भरा . 


विदा 2020. 

अपनी परछाइयों को लौटने नहीं देना नए साल में 

बस इतनी सी प्रार्थना है .