शुक्रवार, 28 जनवरी 2022

लोकतन्त्र का पर्व चुनाव

लोकतन्त्र का पर्व चुनाव 

जन गण मन  का पर्व चुनाव 

गणतन्त्र का मर्म चुनाव 

लोकतन्त्र का पर्व चुनाव 


जाति की बंधन तोड़ो 

धर्म का भेद छोड़ो 

अपने मुद्दों को पहचानो 

मत छोड़ो मजधार में नाव  

लोकतन्त्र का पर्व चुनाव 

गणतन्त्र का मर्म चुनाव 


लोक लुभावन वादों को छोड़ो 

असली मुद्दों से नाता जोड़ो 

रोजी रोटी का न हो तनाव 

लोकतन्त्र का पर्व चुनाव 

गणतन्त्र का मर्म चुनाव 


अमीर गरीब को समान अधिकार 

सबको धंधा सबको रोजगार 

न हो किसी को कोई अभाव 

लोकतन्त्र का पर्व चुनाव 


सोमवार, 17 जनवरी 2022

अमेरिकन कवयित्री ग्वेन्डोलिन ब्रूक्स की कविता "द क्रेज़ी वुमेन" का अनुवाद

अमेरिकन कवयित्री  ग्वेन्डोलिन ब्रूक्स की कविता "द क्रेज़ी वुमेन" का  मूल अँग्रेजी से अनुवाद अरुण चन्द्र रॉय द्वारा 


मैं नहीं गाऊँगी मई का गीत 

मई के गीत मे होना चाहिए मनमीत 

मैं करूंगी नवम्बर के आने का इंतजार 

और गाकर करूंगी उदासी का इज़हार 


मैं करूंगी नवम्बर तक प्रतीक्षा 

तभी पूरी होगी मेरी आंकक्षा 

मैं धुंध अंधेरे में बाहर जाऊँगी 

और ज़ोर ज़ोर से गाऊँगी 


और दुनिया मुझे घूरेगी 

मुझपर फब्तियाँ कसेगी 

"कहेगी  है यह औरत पागल, है पागल इसकी रीत " 

जो नहीं गाती है मई  में खुशी के गीत। "

बुधवार, 22 दिसंबर 2021

लुइस मुनोज की कविता ओह ! का अनुवाद

हवाओं में फैली

महंगे समानों से भरी 

थैलियों की आवाज

जैसे रेत के गड्ढों के पंजों के बीच

अटखेलियां करती हवा । 


सुबह सवेरे पकौड़ों की दुकान की आवाज

जिसका फर्श  साफ किया गया है

अभी अभी और

चमक उठी हैं इसकी दीवारें

ग्राहकों की आवाजाही से पहले। 


- अनुवाद : अरुण चन्द्र रॉय

(लुइस मुनोज स्पेनिश कवि हैं। इनकी छोटी कविताएं अत्यंत जटिल होती हैं और विशेष अर्थ एवं भाव लिए होती हैं, जिसे समझने के लिए कविता के भीतर प्रवेश करना होता है।)

मंगलवार, 21 दिसंबर 2021

मन के भाव

 उदसियां बताती हैं 

कितना है प्रेम 

क्रोध बताता है 

कितनी है आसक्ति 

पीड़ा बताती है 

कितना है मोह।


प्रेम, मोह और आसक्ति 

सब मन के भाव के पर्याय हैं 

और कुछ नहीं। 









दिसंबर की धूप


तुम्हारे खयालों सी है

दिसंबर की धूप

नसों में समा जाती है

अलसा देती है

और छूने से पहले ही

लौट जाती है। 


दिन के छोटे होने का एहसास 

कराती है दिसंबर की धूप।