मंगलवार, 12 फ़रवरी 2019

जलीय कीट

ए. के. रामानुजम की कविता "दी स्ट्राईडर्स" का अनुवाद - जलीय कीट

बाकी सब कुछ छोडिये 

कुछ पतले पेट वाले 
बुलबुले सी पारदर्शी आँखों वाले जलीय कीट 
उन्हें देखिये, ध्यान से देखिये 

उन्हें देखिये कैसे वे सूखी नलिका जैसी टांगों से
भारहीन होकर
लहरों के सतह पर
करते  हैं अटखेलियाँ

नहीं . केवल ईश्वर ही
जल पर तैरने का चमत्कार नहीं करते.
ये जलीय कीट
प्रकाश के अजश्र धाराओं पर बैठ
अनंत आकाश में गहरे धंसा देते हैं
अपनी आँखे .


(नोट: स्ट्राईडर्स यूरोपीय जलीय कीड़े हैं जो साफ़ पानी पर रहते हैं .  इन्हें कई बार जीसस बग भी कहा जाता है क्योंकि ये  पानी के प्रबल से प्रबल प्रवाह को झेल लेते हैं.   ये पानी में डूबते नहीं. इनके पैरों के बनावट अनोखी होती है. इसी जीवटता को अंग्रेजी के भारतीय कवि ए. के. रामानुजम ने अपनी कविता में कहा है . अनुवाद की असफल कोशिश की है ,क्योंकि अभी इस कविता के मर्म तक नहीं पहुँच पाया हूँ . ) 

गुरुवार, 17 जनवरी 2019

मैं भूख का गीत हूँ

जिनकी थाली नहीं है रोटी
उन भूखों का गीत  हूँ
जिनके बोल सुने न कोई
उनके स्वर का संगीत हूँ
                               मैं भूख का गीत हूँ .
उम्मीद रोप कर आया वह
उस भविष्य का बीज हूँ
जिनके घर पसरा अँधेरा
उनका दिवाली तीज हूँ
                           मैं भूख का गीत हूँ .

पत्ते झडे ज्यों शाख से
मौसम का पीत हूँ
उम्र जिनकी गुज़र गई
उस दर्द की रीत हूँ
                           मैं भूख का गीत हूँ .










त्रुटियाँ

१.
त्रुटियाँ 
मनुष्य ही कर सकता है 
त्रुटियों का एहसास 
उसे और भी अधिक मनुष्य बनाता है 
त्रुटियों से जब हम सीखने लगते हैं 
गढ़ने लगते हैं मनुष्य होने का अर्थ . 

२. 
मनुष्य यदि 
न करे कोई त्रुटि
वह ईश्वर होने लगता है 
जिसके अस्तित्व का 
होता है केवल आभास 
प्रत्यक्ष होते हैं 
त्रुटियों से भरे मनुष्य 

३.
बुद्धिजीवी 
करते हैं त्रुटियों का 
आर्थिक, सामाजिक और मनोवैज्ञानिक विश्लेषण 
करते हैं विमर्श 
लिखते हैं लेख 
आम मनुष्य फिर कर बैठते हैं 
एक नई त्रुटि 
जिससे बुधिजीवी रहते हैं अपरिचित 
खांटी मनुष्य होने के लिए 
जरुरी तत्व है त्रुटि . 



रविवार, 13 जनवरी 2019

लौटती नहीं नदियां

नदियां
किसी एक स्रोत से नहीं निकलती
कई छोटी बड़ी धाराओं के मिलने से
बनती है नदी
नदियां आगे बढ़ जाती हैं
स्रोत अलग अलग अकेले रह जाती हैं
स्रोत तक कब कौन लौटता है
कहां लौटते बड़े हुए बच्चे माओं की गोद में
नहीं लौटी है बेटियां मायके पहले की तरह
रास्ते भी नहीं लौटते पगडंडियों की ओर।

शुक्रवार, 11 जनवरी 2019

बच्चे जो मर जाते हैं


अमेरिकी  अश्वेत कवि लैंग्स्टन ह्यूज की कविता "किड्स हु डाई" का अनुवाद 

 बच्चे जो मर जाते हैं 


यह मर जाने वाले बच्चों के लिए है
जो हो सकते हैं किसी भी जाति, धर्म या रंग के,
उन बच्चों के लिए जो 
निश्चित तौर पर मर जायेंगे 
कुलीन और अमीर लोग रहेंगे जीवित 
हमेशा की भांति 
चूसते हुए शोणित, खाते हुए सोना-चांदी
बच्चो को मरणासन्न छोड़ कर ।

बच्चे मिसिसिपी के खेतों में मर रहे होंगे 
जब उनके माता पिता बटाई पर कर रहे होंगे खेती 
बच्चे शिकागो की गलियों में मर रहे होंगे 
जब उनके माता पिता कर रहे होंगे मजदूरी 
कलिफ़ोर्निया के संतरा के बागानों में भी मर रहे होगे बच्चे 
चुनते हुए संतरा 
गोरे और फिलिपिनो,
नीग्रो और मैक्सिकन,
हर रंग, धर्म के बच्चे मारे जायेंगे 
वे बच्चे जो नहीं जानते हैं अभी 
क्या होता है झूठ, कैसे ली जाती है रिश्वत, लालच 
और छद्म शांति ।

बुद्धिजीवी और ज्ञानी 
जो लिखते हैं अखबारों के सम्पादकीय 
जिन महान लोगों के नामों के पहले लगा होता है "डॉ." 
किसी भी जाति, धर्म के 
जो करते हैं सर्वेक्षण , लिखते हैं किताबें
जो शब्दों का चक्रब्यूह रचते हैं मरने वाले बच्चों की हत्या के लिये 
और सुस्त न्यायलय, रिश्वतखोर पुलिस
और रक्तपिपासु सेना, 
धनाढ्य साधू-संत और धर्मप्रचारक 
सब खड़े मिलेंगे एक पक्ष में मरे हुए बच्चों के विरुद्ध 
कानून के अनुच्छेदों, बन्दूक के छर्रों की सहायता से हराते हुए 
डराते हुए

मरने वाले बच्चे  होते हैं 
जैसे आदमी के रक्त में लौह-तत्व 
और ये कुलीन और अमीर लोग नहीं चाहते 
लोगों के जिह्वा पर चढ़े मरने वाले बच्चों के खून का लौह-तत्व  
क्योंकि वे नहीं चाहते लोगों को हो जाए उनके भीतर की ताकत का एहसास 
एंजेलो हेरंडन की बातों पर हो विश्वास या फिर वे हो जाएँ एकजुट 

सुनो मरने वाले बच्चों 
तुम्हारे लिए नहीं बनेगा  कोई स्मारक 
अलग बात है कि बसे रहोगे तुम हमारे हृदयों में 
हो सकता है तुम्हारा मृत शरीर फेंक दिया जाय किसी  दलदल में 
या किसी जेल के कब्र में या  किसी खेत में दफना दिया जाए 
या बहा दिया जाय किसी नदी में 
किन्तु आएगा ऐसा दिन 
जब हजारों कदम एक साथ उठ पड़ेंगी 
और तुम्हारे हक में आवाज़ उठाएंगी
तुम्हारे लिए प्रेम, ख़ुशी और आनंद का स्मारक बनायेंगी 
जब विभिन्न जातियों और धर्म के हाथ एक साथ मुट्ठियों में बदल जायेंगी 
और मरे हुए बच्चो के बहाने 
उनके गीत क्षितिज पर छा जायेंगे 
वह गीत विजय का होगा, वह गीत विजय का होगा . 

सोमवार, 7 जनवरी 2019

पिक्सल

इनदिनों 
हम सब गिने जा रहे हैं 
बाइट्स में 
पिक्सल में 
हमारी पहचान 
मापी जा रही है 
हमारे चेहरे के रेसोल्यूशन के 
जितना अधिक रेसोल्यूशन 
उतनी ही स्पष्ट पहचान 

चेहरे के ऊपर चढ़ाये हैं कई कई चेहरे 
कितनी ही परतों में 
जिन्हें गिना जाना संभव नहीं 
पिक्सल और बाइट्स की गणना से . 




रविवार, 6 जनवरी 2019

अपेक्षा

1
बीज से
वृक्ष की अपेक्षा
वृक्ष से
फल की अपेक्षा
फल से पुनः
बीज की अपेक्षा

2
दीप से
रोशनी की अपेक्षा
रोशनी से
तिमिर के अंत की अपेक्षा
तिमिर के अंत होने से
नई भोर की अपेक्षा।

जलीय कीट

ए. के. रामानुजम की कविता "दी स्ट्राईडर्स" का अनुवाद - जलीय कीट बाकी सब कुछ छोडिये  कुछ पतले पेट वाले  बुलबुले सी पारदर्शी आँख...