मंगलवार, 12 जनवरी 2010

रिश्तों को भार ना बनाएं



रिश्तों को भार ना बनाएं


कहें, सुने, बातें मनवायें, मना ना करें


रिश्तों को भार ना बनाएं


उम्र छोटी है, बातों को लम्बी ना बनाएं


रिश्तों को भार ना बनाएं


ख़ामोशी की दुरी होती है लम्बी


समझें, समझायें, चुप्पी तोड़ें


रिश्तों को भार ना बनाएं


ये सड़क लम्बी है दूर तक जायेगी


क्षितिज को मिलाने का खाब हम क्यों पालें


रिश्तों को भार ना बनाएं

4 टिप्‍पणियां:

  1. रचना अच्छी लगी लोहडी पर्व की बहुत बहुत शुभकामनायें

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  2. उम्र छोटी है, बातों को लम्बी ना बनाएं.....sahi hai

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  3. ख़ामोशी की दुरी होती है लम्बी



    समझें, समझायें, चुप्पी तोड़ें
    sach kaha rishton me chuppi inaka fasala badha deti hai,sunder bhav.

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  4. "रिश्तों को भार ना बनाएं "
    yadi bhar hai to rishta hi nahin bachega, rishto ko is tarah nibhaye ki un per garv ho ,hame sharminda na hona pade. rishte nai urja dete hai to bhale lagte hai. per had se gujar jaye to khamosh ho jate hai.

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