सोमवार, 15 जुलाई 2019

कैसे हैं सरकार ?

कैसे हैं सरकार
आपको नमस्कार !

टूट गया तटबंध 
डूब गए हैं गाँव 
बह गए हैं घर 
मेघ ही अब छाँव 
भूख से मर रहे बच्चे 
हम गा रहे मल्हार 
कैसे हैं सरकार 
आपको नमस्कार !


साल दर साल
कहानी है एक 
किन्तु आपके पास 
बहाने अनेक 
जीवन की इस विपदा का 
होगा कोई जिम्मेदार 
कैसे हैं सरकार 
आपको नमस्कार 

सूखा भी हम भोगे 
हम ही भोगे बाढ़ 
मौसम की मनमर्जी 
सूखा रहे अषाढ़
दोनों ही स्थति में 
सूना रहते खेत पथार
कैसे हैं सरकार 
आपको नमस्कार !

अपनी स्थिति का 
मेनिफेस्टो में नहीं स्थान 
संसद में नहीं गूंजती 
जनता का विलाप-गान 
चुनाव तक हमसे नाता 
फिर क्या हमारी दरकार 
कैसे हैं सरकार 
आपको नमस्कार !




6 टिप्‍पणियां:

  1. वाह ... करार व्याग ...
    हमेशा की तरह लाजवाब ... निःशब्द करती ...

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  2. वोट दे आयेंगे फिर पाँच साल गीत कविता गायेंगे आईये सरकार । वाह बहुत खूब।

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  3. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (17-07-2019) को "गुरुसत्ता को याद" (चर्चा अंक- 3399) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    गुरु पूर्णिमा की
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  4. गज़ब की रचना...शब्द और भाव दोनों अद्भुत...

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