सोमवार, 16 सितंबर 2019

जी



जी जी कहने में 
लगे हैं संतरी 
जी जी कहने में 
लगें हैं मंत्री 
हम ही जो कहने लगे जी जी 
आपको क्यों हुई नाराजगी !

जी जी कहने में 
लगे हैं अखबार 
जी जी कहने में 
लगे हैं पत्रकार 
जी जी की रट में समाचार 
हो गया व्यापार 
हमारा जी जी 
क्यों हो गया व्यभिचार !

जी जी कहने में 
लगे हैं उद्योगपति 
जी जी कहकर 
जुटा रहे अकूत संपत्ति 
जी जी जो न करे 
उसकी है अधोगति 
फिर हमारी जी जी से 
आपको क्यों लगा मारी गई मेरी मति 

जी जी ! 

4 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (18-09-2019) को    "मोदी स्वयं सुबूत"    (चर्चा अंक- 3462)    पर भी होगी। --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है। 
     --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'  

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