यार, सच में कमाल लिखा है आपने। पढ़ते ही मन में एक अजीब सी शांति और सोच पैदा हो जाती है। सच कहा गया कि चुप्पी हम खुद चुन सकते हैं, लेकिन सन्नाटा अक्सर किसी ने थोप दिया होता है, जो दिल और दिमाग दोनों पर भारी लगता है। ऐसे शब्द सीधे दिल तक पहुंचते हैं और महसूस कराते हैं कि कभी-कभी बाहरी शोर नहीं, बल्कि भीतर का सन्नाटा ही सबसे ज्यादा असर करता है।
यार, सच में कमाल लिखा है आपने। पढ़ते ही मन में एक अजीब सी शांति और सोच पैदा हो जाती है। सच कहा गया कि चुप्पी हम खुद चुन सकते हैं, लेकिन सन्नाटा अक्सर किसी ने थोप दिया होता है, जो दिल और दिमाग दोनों पर भारी लगता है। ऐसे शब्द सीधे दिल तक पहुंचते हैं और महसूस कराते हैं कि कभी-कभी बाहरी शोर नहीं, बल्कि भीतर का सन्नाटा ही सबसे ज्यादा असर करता है।
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