शुक्रवार, 26 मार्च 2010

एलेक्ट्रोन

एलेक्ट्रोन
अतृप्त होते हैं
अकेले होते हैं


और वे ही हैं
इस धरती के संबंधो
के आधार ।

इक रासायनिक गठबंधन के लिए
इक नए निर्माण के लिए
इक नए सृजन के लिए
इक नई उर्जा के लिए
इक नई सम्भावना के लिए
जरुरी है
अतृप्त होना
अकेले होना
विचरते रहना

एलेक्ट्रोन की तरह।

एलेक्ट्रोन हैं हम
एलेक्ट्रोन हो तुम

चलो रचे नई सम्भावना !

9 टिप्‍पणियां:

  1. चलो रचे नई सम्भावना......
    vipreet paristhitiyon mein bhi sambhavnaon ko talashne kaa aapka junoon nishchay hi aapki drid ichchha shakti ko darshata hai....

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  2. एलेक्ट्रोन हैं हम
    एलेक्ट्रोन हो तुम

    चलो रचे नई सम्भावना !

    सम्भावनाएँ अपरिमित हैं. रचने की जरूरत है
    बहुत सुन्दर रचना

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  3. आहा ! कितनी सुंदर बात कह दी आपने अपनी कविता मे ? संभावनाएं रचना ही जीवन की शुरुवात है .

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  4. एलेक्ट्रोन हैं हम
    एलेक्ट्रोन हो तुम
    चलो रचे नई सम्भावना
    बहुत ही खूबसूरती से बयान कर दी ये दास्ताँ

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  5. तृप्‍त न हो जाएं हम

    बनी रहे अतृप्ति की आस

    फिर भी तृप्ति पाने का विश्‍वास।

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  6. atrupti hi kholati hai sambhavnaon ke naye dwar.isi atrupti se upajate hai trupt rishte....

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