शनिवार, 16 अप्रैल 2011

चर्नोबिल के बाद एकाकी प्रिप्यात नदी

(१९८६ में अविभाजित रूस में विश्व इतिहास में सबसे दुखद नाभिकीय  दुर्घटना चर्नोबिल में हुई थी . जिसका प्रभाव यूरोप तक में पड़ा था. लाखों लोग आज भी इसके प्रभाव से कैंसर से पीड़ित हो रहे हैं. रूस का विभाजन नहीं हुआ होता तो शायद ही इस दुर्घटना के प्रभाव के बारे में दुनिया वाकिफ होती. चर्नोबिल नाभिकीय संयत्र प्रिप्यात नदी के तट पर बसा था जो आज रेडियोधर्मी प्रदूषण के कारण एकाकी है. इसी नदी के एकाकीपन को बांटते हुए यह कविता. ) 

सो रही थी
प्रिप्यात नदी
उस रात भी
क्योंकि युद्ध नहीं था
आसमान में कोई 
लहरें खामोश थी 
जैसे सो रहा हो 
कोई शिशु 
माँ की गोद में

पांच नदियों की
धारा से बनी
यह नदी
नील, अमेज़न या
गंगा नहीं थी
लेकिन लगभग ७१० किलोमीटर की
अपनी यात्रा में
कई आर्थिक पड़ावों  से ज़रूर गुजरी थी

इसके तट पर 
जो शहर बसा है 
नहीं है कोई इसका लम्बा इतिहास 
एक नया शहर 
नए सपनो के साथ 
पता नहीं था इसे कि 
इतिहास हो जायेगा यह शहर 
युवा होने से पहले ही 

उस बरस 
बहुत खुश थी नदी 
जब बस रहा था
चर्नोबिल
नए ऊर्जावान और उत्साही
मजदूरों, अभियंताओं और वैज्ञानिकों के दल
जब रख रहे थे
भविष्य की ऊर्जा  निधि  की नींव
उत्साही थी 
प्रिप्यात नदी भी .

प्रिप्यात के तट पर
रखी जा रही थी नींव
दुनिया के सबसे बड़े नाभिकीय  ऊर्जा   संयत्र की
खुश थी नदी
युवा मजदूरों की पत्नियों और बच्चों की चहल पहल से 
रूस के नौवें  नाभिकीय  शहर के रूप में
जन्म हुआ था इसका 
और प्यार से कहा जाता था 
'दी एटम सिटी'
सभी बहस और मुबाहिसो से परे 
नाभिकीय ऊर्जा को प्रतीक बनना था 
शांति का 
नयी ऊर्जा संस्कृति का 
इसी क्रम में नामकरण हुआ था 
इसकी गलियों का इसकी  सड़को का 
और
नाभिकीय ऊर्जा के शांतिपूर्ण प्रयोग के लिए 
विख्यात वैज्ञानिक के नाम पर
 'इगोर कर्च्तोव' 
नाम पड़ा इसकी  मुख्य सड़क का 
नदी बहुत खुश थी उस दिन 

फिर उस रात
चेर्नोबिल में
शांतिकाल का नाभिकीय बम
रिस पड़ा
रेडियोधर्मी आइसोटोप्स
फ़ैल गए पर्यावरण में
प्रिप्यात नदी में घुल गए
रेडियोन्युक्लैड्स
और प्रिप्यात हो गई
दुनिया की सबसे प्रदूषित नदी
जिसका जल हो गया विष 
अभिशप्त हो गयी नदी 

नहीं रही मछलियाँ 
इसकी तलहटी में 
खाली करा दिया गया 
शहर रातो रात
और बिना मछलियों के 
बिना नावों के 
तट पर खेलते बच्चों के बिना भी 
नितांत अकेली हो गई नदी 

चर्नोबिल बन गया
एक ही रात में
भूतों का शहर
जहाँ शांति के साथ
मर रहे थे हजारों लोग
तरह तरह के कैंसर से
नदी गुमसुम हो गई
चेर्नोबिल की इस दुर्घटना के बाद से
२६ अप्रैल १९८६ को. 

प्रिप्यात आज भी 
है मौजूद 
बिना वजूद के 
सभ्यता के विकास के इतिहास में 
उल्लेख नहीं है 
इस नदी का. 

31 टिप्‍पणियां:

  1. रूस में हुई इस दर्दनाक घटना को नदी का दर्द बनाकर आपने हम सब के साथ साँझा किया है ....उस नदी के सपने और उन लोगों के सपने एक क्षण में धूमिल हो गए ....आपने इतिहास का सन्दर्भ लेते हुए इस घटना को सही सार्थक और मार्मिक तरीके से प्रस्तुत कर सराहनीय कार्य किया है ....आपका आभार

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  2. गंभीर विवरण और सूचनाप्रद.

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  3. त्रासद जीवन की करुण कथा कविता में है।
    इस कविता की स्थानिकता इसकी सीमा नहीं है, इसकी ताक़त है। प्रगतिशीलता, सभ्यता के विकास और चकाचौंध में किस तरह हमारी ज़िन्दगी घुट रही है प्रभावित हो रही है, उसे आपने दक्षता के साथ रेखांकित किया है।

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  4. हमने प्रकृति को प्रदूषित कर दिया।

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  5. अच्छी अभिव्यक्ति...
    चर्नोबिल किसी ना किसी रूप मे आज भी हमारे आसपास है...

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  6. ओह! अरुण भाई
    एक अभिशप्त नदी की करुण कथा आपने हमें सुनाई
    यह जीवन का कटु यथार्थ है
    हमेशा किसी का न रहता साथ है.
    दो दिन की जिंदगी में जो अच्छा हो कर लेना चाहिये
    बस जाते जाते सभी की दुआएं लेते जाना चाहिये

    बहुत बहुत आभार आपका एक शानदार जानकारीपूर्ण और करुणरस से पूर्ण अभिव्यक्ति के लिए.

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  7. त्रासदी पर मार्मिक भावाभिव्यक्ति....
    वर्तमान का यथार्थ है आपकी कविता में ......

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  8. अच्छी ऐतिहासिक रचना .. मार्मिक प्रस्तुति

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  9. त्रासदी की करुण कथा. प्रकृति के साथ छेड़छाड़ कितनी गंभीर होती है?

    सुंदर कविता अनूठा विषय.

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  10. इस दर्दनाक घटना को सार्थक और मार्मिक तरीके से प्रस्तुत किया है

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  11. सो रही थी
    प्रिप्यात नदी
    उस रात भी
    क्योंकि युद्ध नहीं था
    आसमान में कोई
    लहरें खामोश थी
    जैसे सो रहा हो
    कोई शिशु
    माँ की गोद में
    Anupam upmaa hai....dardnaak waqaya aur uskee behtareen abhiwyakti!

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  12. चर्नोबिल की कहानी एक कविता के रूप में.. बहुत बढ़िया.. पर एक दर्दनाक घटना रही जिसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती...

    आभार

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  13. दर्दनाक घटना की मार्मिक अभिव्यक्ति.

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  14. नितांत अकेली हो गई नदी .......

    दारुण .

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  15. Oh! what a tragedy it was! By the way you did really wonderful creative job. Nice work and very nice writing. Congrats.

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  16. उस एकाकी नदी की व्यथा किसने समझी...
    अनदेखे-अनजाने दुख को उभारती एक सशक्त कविता

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  17. उस त्रासदी कि अभिव्यक्ति अपने अछे ढंग से की है, परन्तु कविता के रूप में यह थोड़ी लम्बी लग रही है!

    शुभकामनायें एक अच्छी पोस्ट के लिए...

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  18. फिर उस रात
    चेर्नोबिल में
    शांतिकाल का नाभिकीय बम
    रिस पड़ा
    रेडियोधर्मी आइसोटोप्स
    फ़ैल गए पर्यावरण में
    प्रिप्यात नदी में घुल गए
    रेडियोन्युक्लैड्स
    और प्रिप्यात हो गई
    दुनिया की सबसे प्रदूषित नदी
    जिसका जल हो गया विष
    अभिशप्त हो गयी नदी

    आपका विज्ञान सम्बन्धी वृहत अद्ध्ययन और हिंदी के प्रति रुझान ही ऐसी चमत्कृत करने वाली कविता को जन्म दे सकता है.ये न सिर्फ कविता है बल्कि नाभिकीय अस्त्र-शस्त्र की पैरवी करने वालों की आँखें खोलने वाला शांति का पैग़ाम भी है. बधाई बधाई.

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  19. इस दुखद घटना को नदी के माध्यम से व्यक्त किया है आपने ... दर्दनाक घटना की मार्मिक अभिव्यक्ति ...

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  20. ek manav bhool ne ek sunder nadi shahar aur poori sabhyata ko udasi ke gart me jhonk diya...nadi ke ekakipan ne dukhi kar diya sundarta se utare gaye bhav....

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  21. गुजर के देखना है तो ज़मानों से गुजर के देख
    मुहाने खो चुकीं बस्ती-मकानों से गुजर के देख

    वाकई बहुत ही सही प्रतिबिंब दिखाया है आपने अरुण जी| आप की यह प्रस्तुति मानव सभ्यता की खुदगर्जी को भी निरूपित करती है|

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  22. और बिना मछलियों के
    बिना नावों के
    तट पर खेलते बच्चों के बिना भी
    नितांत अकेली हो गई नदी

    कितनी खूबसूरती से ये दर्द बयान किया आपने.

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  23. फिर उस रात
    चेर्नोबिल में
    शांतिकाल का नाभिकीय बम
    रिस पड़ा
    रेडियोधर्मी आइसोटोप्स
    फ़ैल गए पर्यावरण में
    प्रिप्यात नदी में घुल गए
    रेडियोन्युक्लैड्स
    और प्रिप्यात हो गई
    दुनिया की सबसे प्रदूषित नदी
    जिसका जल हो गया विष
    अभिशप्त हो गयी नदी

    यह त्रासदी थी और किस दर्द के साथ आपने इसे बयां किया है...
    दिल दहलाने वाली त्रासदी...

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  24. त्रासदी झेल रही नदी की व्यथा को मार्मिक शब्द दिए हैं आपने।
    कविता ने हृदय की गहराइयों तक प्रभावित किया।

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  25. त्रासदी की अभिव्यक्ति बेहतरीन ढंग से की है

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