बुधवार, 18 जनवरी 2012

आने वाले वसंत से कुछ बातें


०.
वसंत
तुम्हारे आने की
दस्तक से ही
मन में
उठ जाती  है
एक हूक
पढने को जी करता है
वही चिट्ठी
जो बंद है
वर्षों से
बीच संदूक

१.
वसंत
देखो तो
खिले हुए फूलों को देख
कैसे ईर्ष्या  से
दहक रहा है
उस श्यामली का अंग अंग
कहो तो
कोसती नहीं होगी
तुम्हे !

२.
वसंत
मेरे कहने से
तुम रुक तो
नहीं जाओगे
लेकिन
पल भर के लिए
रुक कर देख लेना
सरसों के पीले खेतो के मेड पर
धूप सेंकती उस अल्हड की आँखों में
जहाँ अब भी
झूल रहे हैं अमलताश के गुच्छे
देखा है उसे किसी ने
इस बरस


वसंत
तुम्हारा इठलाना
सर्वथा
उचित नहीं है
क्योंकि
इस बरस
नहीं लौटेगा
उसका परदेसी
कोरी रहेगी
उसकी साड़ी
तुम जानते नहीं शायद
बेरंग होली की प्रतीक्षा
होती है कितनी
पीड़ादायक 







38 टिप्‍पणियां:

  1. बसंत में खिले हुए अनेक पुष्पों की तरह ...विविध रंग लिए बसंत से वार्तालाप ....
    बहुत सुंदर रचना .....!!

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  2. वसंत
    मेरे कहने से
    तुम रुक तो
    नहीं जाओगे
    लेकिन
    पल भर के लिए
    रुक कर देख लेना
    सरसों के पीले खेतो के मेड पर
    धूप सेंकती उस अल्हड की आँखों में
    जहाँ अब भी
    झूल रहे हैं अमलताश के गुच्छे
    देखा है उसे किसी ने
    इस बरस... basanti khyaal door door tak lahra rahe hain

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    1. एक से बढ़ कर एक क्षणिका ...मन की गहराई में उतरती हुई ..

      हटाएं
    2. एक से बढ़ कर एक क्षणिका ...मन की गहराई में उतरती हुई ..

      हटाएं
  3. तुम जानते नहीं शायद
    बेरंग होली की प्रतीक्षा
    होती है कितनी
    पीड़ादायक
    गहन भाव लिए ...बेहतरीन ।

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  4. अरूण जी,बहुत बेहतरीन रचनायें हैं बधाई स्वीकारें।

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  5. उफ़ ………वसंतागमन ने तो पीडा का दर्शन करा दिया………एक फ़ूल मोहब्बत का भी तो खिलाना चाहिये जिसमे पीडा का समावेश हो सके।

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  6. वन्दना ने आपकी पोस्ट " आने वाले वसंत से कुछ बातें " पर एक टिप्पणी छोड़ी है:

    उफ़ ………वसंतागमन ने तो पीडा का दर्शन करा दिया………एक फ़ूल मोहब्बत का भी तो खिलाना चाहिये जिसमे पीडा का समावेश हो सके।

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  7. वसंत
    तुम्हारा इठलाना...ah !..Lovely !

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  8. बहुत सुन्दर अरुण जी......आखिरी वाला सबसे बढ़िया|

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  9. पल भर के लिए
    रुक कर देख लेना
    सरसों के पीले खेतो के मेड पर
    धूप सेंकती उस अल्हड की आँखों में
    जहाँ अब भी
    झूल रहे हैं अमलताश के गुच्छे
    देखा है उसे किसी ने
    इस बरस

    क्या बात है....इन रचनाओं को पढ़कर आभास हो रहा है...सचमुच वसंत ने दस्तक दे दी है...

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  10. नहीं लौटेगा
    उसका परदेसी
    कोरी रहेगी
    उसकी साड़ी
    तुम जानते नहीं शायद
    बेरंग होली की प्रतीक्षा
    होती है कितनी
    पीड़ादायक
    ....निशब्द कर दिया...सभी प्रस्तुतियाँ एक से बढ़ कर एक..

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  11. कल 20/01/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  12. घूम-घूमकर देखिए, अपना चर्चा मंच
    लिंक आपका है यहाँ, कोई नहीं प्रपंच।।
    --
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल शुक्रवार (Friday) के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  13. Basant ya Vasant
    Ba ho ya va
    Hai to sang SANT ka
    Sant jiski sadhuta ka
    Koi ant nahin hota
    Jis tarah vasant ka sondarya
    Kam nahin hota
    Usi tarah kavita ka
    Achchhi ho to
    Man par bheetar tak hota hai.

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  14. बसंत की प्रतीक्षा हमको भी है..बड़ी सुन्दर कविता..

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  15. बसंत के स्वागत में सुंदर कवितायेँ पेश की हैं.

    शुभकामनाएँ.

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  16. बहुत ही सुन्दर लिखा आप ने आने वाले वसंत पर ,कई पंक्तियाँ दिल को छू गयी ,pahli बार आप का ब्लॉग देखा ,आप को फोलो के रही हूँ,उम्मीद है आप की रचनाये फिर खीच लाएगी यहाँ .......

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  17. वाह!!!!!!!!
    बहुत सुन्दर...सभी सुन्दर...बसन्ती रंग लिए..

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  18. बसंत से वार्तालाप/बहुत सुंदर रचना .

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  19. बहुत भावपूर्ण खूबसूरत अभिव्यक्ति..

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  20. बहुत ही ...अद्भुत चित्रण वसंत का ...और सच में आज पता चला ...स्त्रियों को बसंत से इर्ष्य क्यों होती है ...मेरे दुसरे ब्लॉग पर भी आयें ..
    babanpandey.blogspot.com

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  21. बहुत खुबसूरत रचना अभिवयक्ति.........

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  22. बसंत पर लिखी हर रचना बेमिसाल ..अंतिम मार्मिक है .

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  23. आपकी किसी पोस्ट की चर्चा है नयी पुरानी हलचल पर कल शनिवार 21/1/2012 को। कृपया पधारें और अपने अनमोल विचार ज़रूर दें।

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  24. एक से बढ़कर एक रचनाएं ....आभार

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  25. Bahut khoob Arun ji ...
    Teesri waali to seedhe dil mein utar gayi ... bahut hi samvedansheel ...

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  26. बसंत की प्रतीक्षा हमको बसंत से वार्तालाप खुबसूरत बेमिसाल अभिवयक्ति.

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  27. बहुत बढ़िया!!.......बसंती बयार को बुलाती क्षणिकाएं !!

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  28. "वसंत
    मेरे कहने से
    तुम रुक तो
    नहीं जाओगे
    लेकिन
    पल भर के लिए
    रुक कर देख लेना
    सरसों के पीले खेतो के मेड पर
    धूप सेंकती उस अल्हड की आँखों में
    जहाँ अब भी
    झूल रहे हैं अमलताश के गुच्छे
    देखा है उसे किसी ने
    इस बरस..."

    इन पंक्तियों का कोई सानी नहीं है।

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  29. तुम जानते नहीं शायद
    बेरंग होली की प्रतीक्षा
    होती है कितनी
    पीड़ादायक .....
    ......
    कुछ लोगों के लिए बसंत बसच में बहुत कष्टदायक होता है भाई जी जरा देखें तो ..
    http://anandkdwivedi.blogspot.in/2011/03/blog-post_21.html

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