सोमवार, 2 जनवरी 2012

विदा करते हुए पुराना कैलेण्डर


करते हुए विदा 
पुराना कैलेण्डर
कुछ नहीं बदला 

बस कुछ हिसाब 
नोट कर लिए 

नए कैलेण्डर पर 
कुछ जरुरी तिथियाँ 
नए कैलेण्डर पर  आ गईं
जो यादों में नहीं रह सकती थी

बाकी जो तिथियाँ 
यादों में, स्मृतियों में हैं
उनके लिए
नहीं कोई जरुरत

किसी कैलेण्डर की 

27 टिप्‍पणियां:

  1. कुछ जरुरी तिथियाँ
    नए कैलेण्डर पर आ गईं
    जो यादों में नहीं रह सकती थी
    शब्द शब्द दिल में उतर गयी...खूबसूरत रचना लिखने के लिए आप को बधाई...!

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  2. महत्वपूर्ण यादों के लिए कैलेण्डर की क्या ज़रूरत ... मन का कैलेण्डर जो है, बहुत ही अच्छी रचना

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  3. sach yaaden hamare jehan mein likhi we ibaraten hai jo jab baahar niklalti hain to ek calendar kahan iske aage lagta hai..
    navvarsh kee haardik shubhkamnayen!

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  4. बाकी जो तिथियाँ
    यादों में, स्मृतियों में हैं
    उनके लिए
    नहीं कोई जरुरत
    किसी कैलेण्डर की

    और फिर शायद यही स्थाई हैं ...

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  5. क्या इससे बचा जाये कि, जिन्दगी कैलेण्डर ना हो जाये?

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  6. कैलेण्डर में तारीखें बदलती हैं किसी के दिन नहीं बदलते.. मेरे घर में एक चलता फिरता कैलेण्डर है, जो सारी महत्वपूर्ण तिथियाँ और अवसर याद रखता है... बदले में उसके मायके और ससुराल के बीच मैं "सामाजिक" बन जाता हूँ, जिसे वो अवसर तक याद नहीं होते... गृहणियां ऐसी ही होती हैं!!
    बहुत ही प्यारी है यह कविता!! नए साल की शुभकामनाएं!!आप व्यस्त हैं, मगर हमने कुछ रिश्तों के बीच अपनी व्यस्तताओं को कभी आने नहीं दिया!!

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  7. खूबसूरत रचना|
    आप को भी सपरिवार नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें|

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  8. बाकी जो तिथियाँ
    यादों में, स्मृतियों में हैं
    उनके लिए
    नहीं कोई जरुरत
    किसी कैलेण्डर की

    ....बहुत खूब...लाज़वाब पंक्तियाँ अंतस को छू गयीं..नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें!

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  9. बाकी जो तिथियाँ
    यादों में, स्मृतियों में हैं
    उनके लिए
    नहीं कोई जरुरत
    किसी कैलेण्डर की

    क्या बात है !!
    बहुत सच्ची बात कही आप ने !!

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  10. दस दिनों तक नेट से बाहर रहा! केवल साइबर कैफे में जाकर मेल चेक किये और एक-दो पुरानी रचनाओं को पोस्ट कर दिया। लेकिन आज से मैं पूरी तरह से अपने काम पर लौट आया हूँ!
    नववर्ष की हार्दिक मंगलकामनाओं के आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि-
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल मंगलवार के चर्चा मंच पर भी होगी!

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  11. कुछ नया पाया नहीं,
    क्या साल वह आया नहीं..

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  12. वह तो दिल में क़ैद हो जाता है।

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  13. bahut achcha yahi hota hai.sahi kaha hai kuch yaadon ke liye calendar ki jaroorat nahi hoti.
    nav varsh ki shubhkamnayen.nav varsh me aapke blog se jud gai hoon.milte rahenge.

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  14. अच्छी प्रस्तुति .. नए साल में बस कलैंडर ही बदलता है ..यूँ तो हर पल नया है ..

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  15. जी बस सब खेल ही तो है... तिथियों का...
    लोग खाम्खावाह .. जिंदगी नाम दे देते हैं.

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  16. मनोज कुमार ने आपकी पोस्ट " विदा करते हुए पुराना कैलेण्डर " पर एक टिप्पणी छोड़ी है:

    वह तो दिल में क़ैद हो जाता है।

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  17. उसके लिए तो ज़ेहन ही बहुत है उनको छूटने ही नहीं देता |

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  18. बहुत ही बढि़या प्रस्‍तुति
    कल 04/01/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्‍वागत है, 2011 बीता नहीं है ... !

    धन्यवाद!

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  19. bahut sundar ... kai yaden chhod gaya ...kya ye kabhi vapas nahi aayega ? tarikhe to wahi hai tarike badal jayege

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  20. यादों के लिए किसी की ज़रूरत नहीं होती..

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  21. बहुत बढ़िया सर!

    नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ।


    सादर

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  22. प्रस्तुति अच्छी लगी । मेरे नए पोस्ट " जाके परदेशवा में भुलाई गईल राजा जी" पर आपके प्रतिक्रियाओं की आतुरता से प्रतीक्षा रहेगी । नव-वर्ष की मंगलमय एवं अशेष शुभकामनाओं के साथ ।

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  23. वाह .. सच कहा है अरुण जी ... जो तिथियाँ स्मृति में होती हैं उनको याद नहीं रखना पढता ...
    नया साल मुबारक हो ...

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