बुधवार, 26 अप्रैल 2017

झारखण्ड एक्सप्रेस -4




वह चंद्रपुरा में चढ़ता था 
बोरियों में भरकर कोयला 
उतर जाता था गया स्टेशन आने से पहले 
वापसी में वह गया पैसेंजर से लौट आता था 
पकड़ा जाता था अक्सर 
खाता था लाठी , जाता था जेल 
था वह मैट्रिक फेल 

उसके गाँव में बना था खादान 
उसकी जमीन पर बिछी थी रेलवे की पटरियां 
और फिर पटरी पर आ गई थी उसकी ज़िंदगी 

झारखण्ड एक्सप्रेस 
कहते हैं कोयला चोरो की गाडी बन गई है 
जो है उसकी लाइफलाइन !

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