सोमवार, 19 जून 2017

मिट्टी



नमी रखकर 
अपने भीतर 
बीज को देती है गर्मी 
बीज पनपता है 
देता है फल फूल 
और गिरकर 
मिट्टी बन जाता है 

मिट्टी 
न तो बीज के वृक्ष बनने पर 
इतराती है 
न उसके मिट्टी में मिलने पर 
करती है विलाप /रोदन 

मिट्टी गर्म होती है धूप से 
वह गीली होती है पानी से 
वह पक कर आग में ईंट हो जाती है 
कुम्हार के चाक पर ढल जाती है 

फिर से मिट्टी होने पर  उसे कोई गुरेज़ नहीं 
यही है मिट्टी की सबसे बड़ी पहचान।  


2 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर रचना..... आभार
    मेरे ब्लॉग की नई रचना पर आपके विचारों का इन्तजार।

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