बुधवार, 9 अगस्त 2017

अधूरी आजादी




बेटी मरती कोख में 
बैठा बेटा बेरोज़गार  
कैसे मनाये आप कहें
आजादी का त्यौहार 

हाथ में जिनके हुनर 
थामे वे तलवार 
उन्मादी दुनिया में देखो
मानव का व्यवहार 
कैसे मनाये आप कहें
आजादी का त्यौहार 

खेत ऊसर हो रहे 
खेती घाटे का व्यापार
सूद का फंदा कस रहा
बदल के चेहरा साहूकार 
कैसे मनाये आप कहें 
आजादी का त्यौहार 

साल दशक कई बीते
छंटा न अन्धकार
ऊँचा होता जा रहा 
घावो का अम्बार 
कैसे मनाये आप कहें
आजादी का त्यौहार 


जल जंगल जमीन सब 
कर रहे हाहाकार 
सोई गहरी नींद में 
जनता और सरकार 
कैसे मनाये आप कहें
आजादी का त्यौहार 

जन जन को बाँटने का 
फूल रहा कारोबार
हवा पानी धूप पर
बिठाये अपने पहरेदार
कैसे मनाये आप कहें 
आजादी का त्यौहार

सबको रोटी सबको पानी
सेहत अक्षर का अधिकार
बस इतना सा मांगे देश 
निरुत्तर क्यों सरकार
कैसे मनाएं आप कहें
आजादी का त्यौहार। 

4 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (11-08-2017) को "हम तुम्हें हाल-ए-दिल सुनाएँगे" (चर्चा अंक 2693) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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