१
लौट जाता है सूरज
समंदर के आँचल में
चला आता है चाँद
अपने घर से
लेकिन ख़त्म नहीं होती
आसमान की प्रतीक्षा
२
लहरे
लौट आती हैं
छू कर तटों को
लेकिन साथ नहीं आता तट
लहरों के साथ
ख़त्म नहीं होती
लहरों की प्रतीक्षा
अपने घर से
लेकिन ख़त्म नहीं होती
आसमान की प्रतीक्षा
२
लहरे
लौट आती हैं
छू कर तटों को
लेकिन साथ नहीं आता तट
लहरों के साथ
ख़त्म नहीं होती
लहरों की प्रतीक्षा
३
सपने
आते है रोज
झिलमिलाते
गुलमोहर सजाये
चले जाते हैं
आँख खुलने के साथ ही
फिर भी अच्छा लगता है
सपनों की स्वप्निल प्रतीक्षा
४
रोज सुबह से
कोई देखता है रास्ता
डाकिये का
मालूम भी है कि
नहीं आयेगी कोई चिट्ठी
उसके नाम तुम्हारे गाँव से
फिर भी उसे पसंद है
सांझ ढले तक करना
डाकिये की प्रतीक्षा
५
पलकें बिछाए
मन की चौखट पर
खड़ा हूँ मैं
वर्षों से
लेकिन नहीं आये
तुम्हारे आलता भरे पाँव
वर्षों से
लेकिन नहीं आये
तुम्हारे आलता भरे पाँव
अनवरत है
प्रतीक्षा मेरी भी .