कैसी होती है मृत्यु
कैसा होता है इसका स्वाद
क्या होता है इसका कोई रूप भी
क्या देता है यह निर्वाण
कैसा सुख है इस में
जो करता है बंधनो से मुक्त
कितनी पीड़ा देता है
जो होती है कोई प्रतीक्षा
या विछोह ही।
प्रेम भी तो मृत्यु ही है
रहस्य से भरा
रहस्यहीन भी।
