चाँद तुम मुस्कुराना
पृथ्वी के होने तक
अभी लालटेन के नीचे
पढ़ रहे हैं
झूम झूम कर बच्चे
माँ लकड़ी वाली अंगीठी मेंसेंक रही है गोल रोटियां
तुम खाकर जाना
लगाने पृथ्वी का चक्कर
चाँद तुम मुस्कुराना
माँ और बच्चों के होने तक
अभी उड़ेंगे जहाज के जहाज
और बरसा जायेंगे
बम और बारूदचुपके से अँधेरे में
धरती के किसी कोने में
जब सो रही होगी चिड़िया
अपने बच्चों के साथ
तुम रोना , जरुर रोनारोना एक प्रतिक्रिया है प्रतिरोध का
चाँद तुम रोना
पृथ्वी पर बम बारूद के होने तक
मेरे पीछे
पड़े है कई हथियारबंद लोग
तरह तरह के लेकर हथियार
इन हाथियारों से टंगे हैं कई कई तरह के झंडे
कुछ भूगोल के झंडे
कुछ धर्म के झंडे
कुछ जाति के झंडे
वे नहीं रहने देंगे
आदमी को आदमी
चाँद तुम मत बँटना
लड़ना, पृथ्वी पर आदमी के होने तक .