मंगलवार, 23 सितंबर 2014

पेड़



पेड़ 
कटते हैं 
बनते हैं 
खिड़की, किवाड़ 
कुर्सी पलंग 
और धर्मशास्त्र रखने के लिए 
तख्त 

दंगा नहीं करते 
पेड़ कभी
कि रोपा था उसे किसी और धर्म के व्यक्ति ने 
और रखा जा रहा है 
किसी और धर्म का शास्त्र 

फिर भी पेड़ नहीं छोड़ता 
अपना धर्म ! 

10 टिप्‍पणियां:

  1. सुन्दर रचना !
    मेरे ब्लॉग पर आये और फॉलोवर बनकर अपने सुझाव दे !

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  2. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति बुधवार के - चर्चा मंच पर ।।

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  3. सच्ची सीख
    गहरा मर्म
    किंतु मनुज को
    नहीं शर्म

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  4. पेड़ का एक ही धर्म है सेवा ,मानव धर्म का गलत अर्थ लगा लिया है !
    : शम्भू -निशम्भु बध --भाग १

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  5. बहुत ही प्रभावी ... कम शब्दों में गहरी दूर की बात ....

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  6. सत्य.. पेड़ अपना धर्म नहीं छोड़ता कभी

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