सोमवार, 31 जनवरी 2011

अपने जन्मदिन पर


चाहता हूँ 
ढेरो फूल अपने जन्मदिन पर
ताकि उनमे से कुछ  दू उन्हें 
जो शून्य से ३० डिग्री नीचे तक के तापमान पर 
जागते हैं अपलक 
सत्ता के बदलने से नहीं बदलता 
सीमा का माहौल 

कुछ फूल अर्पित करने हैं 
उस बेनाम लड़की के लिए जो 
कहते तो हैं कि आई थी बंगलादेश से
लौट कर जा ना सकी वापिस 
बूढी माँ उसकी सीमा पार 
कर रही है उसका इन्तजार

कुछ फूल बांटने हैं 
शहर के लैंड फिल ज़ोन में 
कचरे के बीच प्लास्टिक बीनते बच्चों के बीच 
जिनकी आँखों में ख़ुशी 
प्लाटिक के चटक किन्तु बेजान रंगों सी  है 
त्यौहारों और उत्सवों से
कुछ फर्क नहीं पड़ता कई जीवनों में 

एक फूल देना है 
हंसकर जो बेचता है फूल 
नुक्कड़ पर देर रात तक 
देते समय फूल निश्छल हंसी के साथ 
शरीक होता है हर छोटे बड़े मौकों पर 


और अंतिम फूल चाहिए 
उसके लिए जो है 
प्रथम पाठिका मेरी कविताओं  की 
प्रथम शिक्षिका जीवन की 
प्रथम पाठशाला प्रेम की 

लेकिन नहीं चाहता मैं 
एक भी फूल टूटे अपनी डाली से
और मुरझा जाए मेरे लिए 
सो जब तक संवेदना जीवित है मुझमे
नहीं देना मुझे कोई फूल कोई शुभकामना 

50 टिप्‍पणियां:

  1. मेरी ओर से ढेर सारे फूल और गुलदस्ते आपको जन्मदिन पर ,उपहार स्वरूप. और उनके लिए भी जिन्हें आप अर्पित करना चाहें. उम्दा कृति !

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  2. bahut bahut sunder bhaavnaein... aur un sudner bhavnaaon ko aur bhi sudner tareeke se shabd milein hain....

    janmdin ki hardik badhai sir....

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  3. आपकी संवेदनशीलता को आज गहराई से महसूस किया अरुण राय ! आपको हार्दिक शुभकामनायें !

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  4. कहते है सर सलामत तो पग़ड़ियां हजारों।
    उसी तरह सम्वेदनाएं बची रहे तो शुभ-भाव स्वतः आ जाएगें।

    लगे हाथ जन्मदिन की शुभकामनाएं, कभी न मुरझाने वाली!!;))

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  5. सत्ता के बदलने से नहीं बदलता
    सीमा का माहौल


    बहुत गहरा भाव ....लाख प्रश्नों का हल बता दिया आपने ...पूरी कविता अर्थपूर्ण है ..आपका आभार

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  6. बहुत भावपूर्ण रचना है आपकी...बधाई स्वीकारें
    नीरज

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  7. बहुत संवेदनशील रचना ...शुभकामनायें

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  8. jnm din bhi mubark ho or is din rchnaatmk soch ke liyen bdhayi. akhtar khan akela kota rajthan

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  9. अरुण भाई इस कविता में समाज के बहुतेरे चौराहों का दर्शन कराए हैं.आदमी कई मर्तबा नहीं जानता कि उसके समानांतर चलने वाली रोज़मर्रा की ज़िंदगी में कितना कुछ उसे सोचने को मज़बूर करते चित्र मिलते हैं.बहुतेरे तो आँख बंद कर जानबूझ कर ही राह नापते हैं.और ऐसे में छूट जाता है बहुत ज़रूरी हिस्सा.जहां परख होती है मानवता की.आदमी की कसावट को नापा जा सकता है ऐसे मौकों पर.भाई वाह

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  10. लेकिन नहीं चाहता मैं
    एक भी फूल टूटे अपनी डाली से
    और मुरझा जाए मेरे लिए
    सो जब तक संवेदना जीवित है मुझमे
    नहीं देना मुझे कोई फूल/कोई शुभकामना...

    सबसे पहले तो आपको जन्म दिन की बहुत - बहुत शुभकामनायें....
    रचना बहुत ही प्रभावशाली है, एक - एक पंक्ति गहरा भाव लिए हुए है..

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  11. श्री अरुणजी, आपकी कविता में साम्प्रत घटनाओं से जूडी संवेदना और आखिर में छोटा सा चमत्कार काबिले तारीफ़ हैं | जन्मदिन की यह गिफ्ट अद्भूत हैं |

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  12. चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी प्रस्तुति मंगलवार 01- 02- 2011
    को ली गयी है ..नीचे दिए लिंक पर कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया ..

    http://charchamanch.uchcharan.com/

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  13. बहुत भावुक होकर ,अपने जन्मदिन पर ये कविता लिखी है....और इसमें उन सबका जिक्र है जो थोड़े से कम भाग्यशाली हैं....गहरे तक छू गयी ये रचना.
    आपको जन्मदिन की असीम-अनंत शुभकामनाएं

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  14. बहुत-बहुत बधाई!
    21 जनवरी को ही मेरे उच्चारण की भी वर्षगाँठ होती है!

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  15. अरुणजी -अदभुत कविता है .उम्मीद है इस कविता से एक बेफिक्र लड़की वाला उम्र का कोई विवाद किसी उत्साहित विद्वान द्वारा नहीं उठेगा.
    मन को भिगो गई यह कविता .

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  16. बढ़िया कविता , जन्मदिन की बहुत बहुत बधाई

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  17. अरुण जी!! सबसे पहले तो हमारा आशीर्वाद लीजिये आपकी सालगिरह पर! गोया जितने वसंत आपने अब तक देखे उनपर कुछ और शून्य जुड़ जाएँ, इतने वस्न्त हों आपके जीवन में!
    आपकी पवित्र सम्वेदनाओं पर तो कभी उँगली नहीं उठा सकता कोई!आज जो आपने पुष्प की अभिलाषा व्यक्त की है उसमें अंतिम को छोड़कर बाकी सभी पर व्यवस्था ने जीते जी पहले ही फूल चढ़ा रखे हैं...
    आपकी सम्वेदनाएँ बनी रहें!!

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  18. बहुत भावपूर्ण रचना है| जन्मदिन की बहुत बहुत बधाई|

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  19. आपके जन्मदिन पर अनगिनत शुभकामनायें ....

    और अंतिम फूल चाहिए
    उसके लिए जो है
    प्रथम पाठिका मेरी कविताओं की
    प्रथम शिक्षिका जीवन की
    प्रथम पाठशाला प्रेम की
    ... हर फूल आपको देने हम आए हैं और कामना है
    आपकी प्रथम पाठिका आपके लिए समूह का आह्वान करे

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  20. आपके पुष्प-हृदय को भावनाओं के संस्पर्श की शुभकामनायें।

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  21. लेकिन नहीं चाहता मैं
    एक भी फूल टूटे अपनी डाली से
    और मुरझा जाए मेरे लिए
    सो जब तक संवेदना जीवित है मुझमे
    नहीं देना मुझे कोई फूल कोई शुभकामना
    Bahut sundar bhavna!!

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  22. आप यूं जब जन्मदिन की बातें बताने लग गए
    तो लफ्ज फूलों की तरह खुशबू लुटाने लग गए।
    जन्म दिन की ढेरों शुभकामनाएं।

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  23. जन्मदिन की असीम शुभकामनाएं, देर से ही सही.

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  24. लेकिन नहीं चाहता मैं कोई फूल डाली से टूटे ...
    शब्दों के सन्दर्भ में देखें तो फूल को टूट कर बिखरते देख माली का दुःख असीम होता है ...अर्थ में देखें तो जीवन बगिया का कोई पुष्प ना मुरझाये...सर्वे भवन्तु सुखिनः की अभिलाषा ..
    भावपूर्ण कविता!

    जन्मदिन की बहुत शुभकामनायें !

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  25. फूल नहीं आप तो पूरा गुलदस्‍ता लीजिए शुभकामनाओं का.

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  26. कौन सा फ़ूल करूँ अर्पण
    जो मुस्कान अक्स पर ले आये
    ये फ़ूलों से महकते जीवन मे
    बहार इक नयी ले आये
    हर फ़ूल तुझे मिल जायेगा
    और समय भी तेरा खिल जायेगा
    पर मन मयूर ना मुस्कायेगा
    चल आज तुझे मैं देती हूँ
    इक फ़ूल मोहब्बत की इबादत का
    कर बन्दगी मोहब्बत की
    बना मोहब्बत को खिलता कँवल
    फिर देखना अपने चारों तरफ़
    हर कँवल मोहब्बत का खिल जायेगा
    हर कँवल मे तुझको खुदा नज़र आयेगा


    माफ़ी चाहती हूँ अरुण जी ……………इस बार बहुत देर से आ रही हूँ ।
    आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें………ईश्वर आपकी हर इच्छा पूर्ण करे…………मेरी तरफ़ से ये कविता रूपी तोहफ़ा स्वीकार करियेगा।

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  27. जन्म दिन पर ऐसे ही संवेदन शील विचारों की ज़रूरत होनी चाहिए .. हर जन्म दिन पर हरामी संवेदना शक्ति भी बढ़नी चाहिए ... आपके कविता उस बढ़ी हुई संवेदना और चेतना की द्योतक है ...

    सादर

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  28. आपकी कविता पर एक फूल की भावनायें:
    जन्‍म लेते ही लिये मुस्‍कान था मैं
    भावनाओं की लिये पहचान था मैं
    जब मुझे देखा तो तुमने चुन लिया था
    जो जिसे कहना था, मुझसे कह दिया था
    मैंनें ग़म, खुशियों में कब अंतर किया था
    जब, जहॉं, जैसा मिला जीवन जिया था
    भावनाओं का कोई रिश्‍ता निभाकर
    मैं सदा ही खुश रहा खुद को भुलाकर ।

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  29. @तिलक राज जी
    सर बहुत बहुत शुक्रिया सुन्दर कविता रुपी उपहार के लिए

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  30. @स्वप्निल
    स्वप्निल तुमने कविता के भीतर जन्मदिन को ना देख कविता के कथ्य को देखा शुक्रिया..

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  31. @वंदना जी
    इतनी सुन्दर कविता के लिए बहुत बहुत धन्यवाद.. आपने तो अभिभूत कर दिया..

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  32. @राहुल सर
    गुलदस्ता के लिए धन्यवाद.. लेकिन मैंने तो शुभकामना के लिए माना किया था संवेदना के जीवित रहने तक... आप कविता पर कहते तो अच्छा लगता ..

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  33. जन्‍मदिन की बहुत-बहुत शुभकामनाएं ...इस भावमय प्रस्‍तुति के लिये आभार ।

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  34. itne samvedansheelta ke saath aapne apni kavita ko ukerit kiya......kya kahun sir!! ek dum se dil ko chhoo gaya...:)

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  35. बहुत संवेदशील रचना..जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें !

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  36. सत्ता के बदलने से नहीं बदलता
    सीमा का माहौल


    बहुत गहरा भाव .लाख प्रश्नों का हल बता दिया आपने .पूरी कविता अर्थपूर्ण है ..
    आभार

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  37. @ रूप जी
    @वर्तिका जी
    @सतीश सक्सेना जी
    @ सुज्ञ जी
    @केवल राम जी
    @नीरज जी
    @ संगीता स्वरुप जी
    @अकेला जी
    @मानिक भाई
    @संध्या जी
    @विश्वगाथा (पंकज त्रिवेदी जी )
    @रश्मि रविजा जी
    @ डॉ. शाश्त्री जी
    @निर्मल गुप्त जी
    @ शारदा जी
    @सलिल जी/ चैतन्य जी
    @रश्मि प्रभा जी
    @प्रवीण पाण्डेय जी
    @क्षमा जी
    @वंदना दूबे
    @वाणी गीत जी
    कविता पर बहुमूल्य टिप्पणी और जन्मदिन पर शुभकामना के बहुत बहुत आभार !

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  38. @मनोज जी
    सर इस कविता पर आपके विशेष टिप्पणी की अपेक्षा थी... कभी फुर्सत मिले तो फिर नज़र डालियेगा.. आंच के योग्य हो तो देखिएगा... .. सादर

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  39. arunji bahut samvedansheel kavita...लेकिन नहीं चाहता मैं कोई फूल डाली से टूटे ....gahari samvedana....doosaron ko khushi dene ke liye kisi ko dard na dene ki chahat.....aur is mouke par bhi un sabhi ko yad rakhana jinhe samanyatah bisra diya jata hai...
    janmadin ki bahut shubhakamnayen....

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  40. मैं तो बस यही कहूंगी और चाहूंगी कि चाहे लिख और अभिव्यक्त कर पानी की क्षमता सबको दें न दें पर ईश्वर सबको ऐसा ही संवेदनशील ह्रदय अवश्य दें...

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  41. वाह बहुत खूबसूरत कविता खूबसूरत फूलों के लिए और उनके उतने ही खूबसूरत उपयोग के लिए..
    मेरी तरफ से बहुत आभार.. वैसे आपका जन्मदिन नज़दीक ही है क्या?

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  42. मै भी आपकी चाह्त मे सरीक होना चाहता हूँ, ताकी आपकी चाहत को परवान मिले,वो फूल आप को हर पल मिले,

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  43. बहुत संवेदनशील रचना ....जन्मदिन की शुभकामनाये स्वीकारें.....

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  44. जन्म दिन की ढेरों शुभकामनाएं।

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  45. आदरणीय अरुण जी
    नमस्कार !
    ...दिल को छू लेने वाली संवेदनशील प्रस्तुती
    जन्मदिन की शुभकामनाएं
    कई दिनों से बाहर होने की वजह से ब्लॉग पर नहीं आ सका
    बहुत देर से पहुँच पाया ....माफी चाहता हूँ..

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  46. जन्‍मदिन की बहुत-बहुत शुभकामनाएं .

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  47. आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें

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  48. आपके जन्मदिन पर हमारी कामना है कि आपकी लेखनी अमर हो जाये . शुभकामना

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